नारनौल, 10 मार्च।
\हरियाणा के नारनौल में बेटियों के सम्मान और समानता का संदेश देने वाली अनोखी पहल देखने को मिली। यहां तीन सगी बहनों की शादी से पहले परिवार ने उन्हें घोड़ी पर बैठाकर पारंपरिक बनवारा निकाला। इस दौरान डीजे की धुन पर परिजन और स्थानीय लोग जमकर झूमे और खुशियां मनाईं।
मोहल्ला मिश्रवाड़ा निवासी फल विक्रेता मनोज कुमार की तीनों बेटियों का विवाह 11 मार्च को होने जा रहा है। शादी से पहले परिवार ने बेटियों को बेटों की तरह सम्मान देते हुए अलग-अलग घोड़ियों पर बैठाकर उनका बनवारा निकाला। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और पूरे उत्साह के साथ नाचते-गाते हुए इस परंपरा को निभाया।
तीनों बहनों के ताऊ कृष्ण कुमार ने बताया कि आज के दौर में बेटा-बेटी में किसी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए। बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, इसलिए उन्हें भी वही सम्मान मिलना चाहिए जो बेटों को मिलता है। बनवारे से पहले परिवार की ओर से सहभोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के लोगों ने मिलकर भोजन किया।
इसी तरह जिले के बालरोड गांव में भी एक पिता ने अपनी बेटी को घोड़ी पर बैठाकर बनवारा निकालकर समाज को समानता का संदेश दिया। अनिल कुमार ने अपनी बेटी सपना को घोड़ी पर बैठाकर विवाह से पहले यह परंपरा निभाई। सपना हरियाणा पुलिस में कार्यरत हैं और उनका विवाह भिवानी जिले के नंदगांव निवासी विपिन से तय हुआ है, जो स्वयं भी हरियाणा पुलिस में सेवाएं दे रहे हैं।
अनिल कुमार ने बताया कि उनके गांव में पहली बार किसी बेटी का घोड़ी पर बनवारा निकाला गया है। उनका मानना है कि समाज में बेटा-बेटी के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान परिवार के लोगों ने डीजे पर नृत्य किया और सहभोज का आयोजन भी किया गया। समारोह में मौजूद लोगों ने बेटी सपना को आशीर्वाद देते हुए इस पहल की सराहना की।



