रांची, 07 मार्च।
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च को शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर 27 मार्च को नवमी के दिन समाप्त होगी। पुरोहित मनोज पांडेय ने शनिवार को बताया कि यह पर्व बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए नवरात्रि को नवसंवत्सर की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु घरों में अखंड ज्योति जलाकर देवी के अलग-अलग रूपों की आराधना करते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार नवरात्रि के दौरान कई शुभ योग बन रहे हैं। इन योगों में पूजा-अर्चना करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शांति आती है।
पुरोहित ने बताया कि ऋषिकेश पंचांग के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन शुक्ल योग का निर्माण होगा। इसके साथ ही कलात्मक योग, शुक्ल योग और छत्र योग में कलश स्थापना की जाएगी। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में पूजा करने से साधकों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों का नाश होता है।
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव से मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना कर देवी को प्रसन्न करते हैं और सुख-सौभाग्य की कामना करते हैं। 26 मार्च को महाअष्टमी का व्रत रखा जाएगा, जबकि 27 मार्च को महानवमी के दिन दुर्गा पाठ, कन्या पूजन, हवन और आरती के साथ पूजा संपन्न होगी। इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव यानी रामनवमी भी मनाई जाएगी।
इसके अलावा चैती छठ पूजा का पर्व 22 मार्च से 25 मार्च तक मनाया जाएगा।
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नहाय-खाय (पहला दिन): 22 मार्च 2026, रविवार
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खरना पूजा (दूसरा दिन): 23 मार्च 2026, सोमवार
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संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): 24 मार्च 2026, मंगलवार (डूबते सूर्य को अर्घ्य)
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उषा अर्घ्य (चौथा दिन): 25 मार्च 2026, बुधवार (उगते सूर्य को अर्घ्य)
उन्होंने बताया कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष से सनातन नववर्ष यानी नवसंवत्सर और बसंत नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस अवसर पर भक्त नौ दिनों तक व्रत रखकर दुर्गा पाठ, जप और विधि-विधान से पूजा करते हैं। नवरात्रि के दौरान कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व भी पड़ते हैं। इस अवधि में भगवान सूर्य की आराधना, चैती छठ व्रत, भगवान विष्णु के मत्स्यावतार तथा भगवान श्रीराम के अवतार दिवस का पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्ष में केवल चैत्र नवरात्रि ही ऐसा अवसर होता है, जब नवसंवत्सर, गौरी तृतीया व्रत और चैती छठ एक साथ मनाए जाते हैं।



