शिमला, 21 फरवरी 2026
हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से लगभग 29 करोड़ रुपये की रकम को फ्रीज करवाकर सुरक्षित किया गया है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार राज्य में साइबर अपराध की शिकायतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जहां 2023 में 8,077 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो 2024 में बढ़कर 12,249 हो गईं और 2025 में यह आंकड़ा 18,706 तक पहुंच गया।
पुलिस का कहना है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ ठग भी नए तरीके अपना रहे हैं। इसी को देखते हुए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और साइबर सेल को सक्रिय किया गया है। 1930 साइबर हेल्पलाइन के प्रचार-प्रसार के साथ स्कूलों और गांवों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। बैंकों के साथ समन्वय कर संदिग्ध लेनदेन पर निगरानी रखी जा रही है ताकि धोखाधड़ी के मामलों को रोका जा सके।
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरवीर सिंह राठौर ने कहा कि साइबर अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ठग फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन समय पर शिकायत करने से धनराशि वापस मिल सकती है।
पुलिस के अनुसार हाल के समय में फर्जी निवेश योजनाओं, नौकरी और वर्क फ्रॉम होम के नाम पर ठगी, व्हाट्सऐप-टेलीग्राम फ्रॉड, यूपीआई और क्यूआर कोड धोखाधड़ी तथा ओटीपी चोरी के मामले अधिक सामने आए हैं। “डिजिटल अरेस्ट” जैसी नई ठगी भी चिंता का विषय बनी हुई है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ओटीपी, यूपीआई पिन और अन्य निजी जानकारी किसी से साझा न करें, अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर दें। समय पर सूचना देना साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जा रहा है।



