श्रीनगर, 12 मार्च।
जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) कश्मीर ने स्वास्थ्य विभाग के बांदीपोरा मेडिकल ब्लॉक में कथित फर्जी नियुक्तियों से जुड़े घोटाले के मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ), डॉक्टरों/चिकित्सा अधिकारियों, एक वरिष्ठ सहायक तथा कार्यालय सहायकों सहित कुल 17 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है।
अधिकारियों के अनुसार इस अनियमितता के कारण राज्य के खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि क्राइम ब्रांच की ईओडब्ल्यू कश्मीर ने विशेष भ्रष्टाचार निरोधक न्यायाधीश बारामूला की अदालत में एफआईआर संख्या 07/2013 के तहत सत्रह आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र प्रस्तुत किया है। इन पर धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और धारा 201 आरपीसी के साथ धारा 5(2) पीसी अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि यह मामला कश्मीर के उप स्वास्थ्य सेवा मुख्यालय, श्रीनगर से प्राप्त एक आधिकारिक संचार के बाद दर्ज किया गया था। इसमें 19 अप्रैल 2010 के सरकारी आदेश संख्या 235-एचएमई में कथित रूप से फर्जी प्रविष्टियां करने का आरोप लगाया गया था। आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से इस आदेश में बदलाव कर मेडिकल ब्लॉक बांदीपोरा में स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त पदों का झूठा सृजन दर्शाया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि विभागीय अधिकारियों और लाभार्थियों ने मिलकर एक सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी तबादला और नियुक्ति आदेश तैयार किए। इन दस्तावेजों का उपयोग पीएचसी चुंटीमुल्लाह, पीएचसी अष्टांगू, एसडीएच बांदीपोरा और पीएचसी शेखपोरा गुरेज में गैर-मौजूद पदों पर कई व्यक्तियों को अवैध रूप से नियुक्त करने के लिए किया गया।
जाली दस्तावेजों के आधार पर इन लाभार्थियों ने नियुक्तियां हासिल कीं और बाद में सरकारी खजाने से वेतन तथा छठे वेतन आयोग का बकाया भी प्राप्त किया।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने जालसाजी और धोखाधड़ी के माध्यम से राज्य के खजाने को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया और खुद अनुचित लाभ अर्जित किया। जांच पूरी होने के बाद मामले में न्यायिक कार्रवाई के लिए आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर दिया गया है।
प्रवक्ता ने बताया कि आरोपपत्र में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, डॉक्टर/चिकित्सा अधिकारी, एक वरिष्ठ सहायक, स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय सहायकों और 12 लाभार्थी कर्मचारियों सहित कुल 17 आरोपियों को शामिल किया गया है, जिन्हें कथित तौर पर गैर-मौजूद पदों पर अवैध रूप से समायोजित किया गया था।


