बिहार
16 Mar, 2026

मनोज भावुक को फिल्म ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ के लिए 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स 2026 में बेस्ट लिरिसिस्ट अवार्ड

भोजपुरी गीतकार मनोज भावुक को 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स 2026 में फिल्म ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ के गीतों के लिए बेस्ट लिरिसिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया।

पटना, 16 मार्च।

बिहार में सीवान जिले के चर्चित गीतकार मनोज भावुक को पटना के बापू सभागार में आयोजित 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स 2026 में बेस्ट लिरिसिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें फिल्म ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ के गीतों के लिए दिया गया। उन्हें यह पुरस्कार इम्पा प्रेजिडेंट अभय सिन्हा द्वारा प्रदान किया गया।

अवार्ड मिलने के बाद मनोज भावुक भावुक हो गए और कहा, “भोजपुरी अवार्ड समारोह की सार्थकता तब है, जब हम उन लोगों को भी याद करें जिन्होंने इसकी नीव डाली। हम सिर्फ अपना ही पीठ नहीं थपथपायें। कल हम भी पुराने हो जाएंगे। मज़ा तब है जब हमारे इस दुनिया में न रहने पर भी लोग हमारे लिए तालियां बजायें।”

मनोज भावुक ने कहा कि “मुझे फिल्मों से बतौर लिरिसिस्ट जोड़ने वाले संगीतकार रजनीश मिश्रा ही हैं। यह अवार्ड उन्हीं को समर्पित। साथ ही निर्माता निशांत उज्ज्वल का भी आभार व्यक्त करता हूं।”

लिरिसिस्ट मनोज भावुक और म्यूज़िक डायरेक्टर रजनीश मिश्रा की जोड़ी हमेशा यादगार गीत देती रही है। फिल्म ‘मेहंदी लगा के रखना’ का लोकप्रिय गीत “तोर बउरहवा रे माई”, फिल्म ‘मेहमान’ का “मेरे राम” और फिल्म ‘आपन कहाये वाला के बा’ के गीतों ने भोजपुरी संगीत को नई पहचान दी है।

भोजपुरी जगत में मनोज भावुक की पहचान शालीन कवि, ग़ज़लकार, संपादक, फिल्म लिरिसिस्ट और फिल्म इतिहासकार के रूप में है। वे उन चुनिंदा रचनाकारों में हैं जिन्होंने बौद्धिक गहराई और लोकप्रियता में संतुलन बनाए रखा है। उन्हें अक्सर “भोजपुरी सिनेमा का इनसाइक्लोपीडिया” कहा जाता है। उनकी शोधपरक पुस्तक ‘भोजपुरी सिनेमा के संसार’ में 2025 तक के भोजपुरी सिनेमा का इतिहास समेटा गया है। इसके अलावा ‘चलनी में पानी’ और ‘तस्वीर ज़िंदगी के’ उनकी चर्चित पुस्तकें हैं।

मनोज भावुक को भोजपुरी का सांस्कृतिक राजदूत माना जाता है। उन्होंने कभी भी व्यावसायिक लाभ के लिए अश्लील या द्विअर्थी गीत नहीं लिखे और हमेशा स्वच्छ व गरिमापूर्ण भोजपुरी का समर्थन किया। उनके गीत भोजपुरी फिल्म संगीत में सकारात्मक उम्मीद जगाते हैं।

पेशे से इंजीनियर रहे मनोज भावुक ने विदेशों में भी काम किया, लेकिन अंततः अपनी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट आए। लंदन और अफ्रीका में रहने के अनुभव ने उन्हें वैश्विक दृष्टि दी और वे भोजपुरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित सांस्कृतिक ब्रांड बनाने के प्रयास में सक्रिय हैं।

वर्तमान में मनोज भावुक महुआ नेटवर्क में प्रोग्रामिंग हेड के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे भोजपुरी के प्रमुख चैनलों के अलावा ज़ी टीवी, न्यूज़18, टाइम्स नाउ, एनडीटीवी और सारेगामापा जैसे मंचों से लेखक और प्रोजेक्ट हेड के रूप में जुड़े रहे।

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