अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा के खगोलविदों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप की सहायता से डार्क मैटर से बनी एक भूतिया आकाशगंगा का पता लगाने में सफलता हासिल की है। इस रहस्यमयी आकाशगंगा को सीडीजी-2 नाम दिया गया है और यह लगभग 99 प्रतिशत डार्क मैटर से निर्मित बताई जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज अंतरिक्ष में छिपे रहस्यों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नासा ने इस उपलब्धि की जानकारी अपनी वेबसाइट पर साझा की है।
हबल टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों में यह कम सतह चमक वाली आकाशगंगा बेहद धुंधली दिखाई देती है। इसमें डार्क मैटर की मात्रा अधिक है और तारों का बिखराव बहुत कम है। वैज्ञानिकों ने उन्नत सांख्यिकीय तकनीक की मदद से तारों के छोटे समूह यानी ग्लोबुलर क्लस्टर्स की पहचान कर इस आकाशगंगा का पता लगाया। यह गैलेक्सी पृथ्वी से लगभग 300 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर पर्सियस गैलेक्सी क्लस्टर में स्थित बताई गई है और इसे चार सघन ग्लोबुलर क्लस्टर्स के माध्यम से पहचाना गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार सीडीजी-2 का लगभग 99 प्रतिशत द्रव्यमान डार्क मैटर से बना है।
नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार आमतौर पर आकाशगंगाएं अरबों तारों की चमक से दूर से दिखाई देती हैं, लेकिन कुछ आकाशगंगाएं इतनी फीकी होती हैं कि उन्हें पहचानना कठिन हो जाता है। इन्हें लो-सरफेस-ब्राइटनेस गैलेक्सी कहा जाता है। इनमें तारों की संख्या बहुत कम होती है और इनका अधिकांश द्रव्यमान डार्क मैटर से बना होता है, जो न प्रकाश उत्सर्जित करता है, न परावर्तित करता है और न ही अवशोषित करता है।
प्रारंभिक माप के अनुसार सीडीजी-2 की कुल चमक लगभग 60 लाख सूर्य जैसे तारों के बराबर आंकी गई है, जो सामान्य आकाशगंगाओं की तुलना में काफी कम है। इस खोज का विस्तृत विवरण द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित किया गया है। हबल स्पेस टेलीस्कोप के संचालन की निगरानी नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर से की जाती है, जो ग्रीनबेल्ट, मैरीलैंड में स्थित है और जहां वैज्ञानिक, इंजीनियर तथा फ्लाइट कंट्रोलर की टीम 24 घंटे काम करती है।



