जयपुर, 16 मार्च 2026।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने ऊंटों की घटती संख्या पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस मुद्दे को लेकर सरकार गंभीर नहीं है और अदालती आदेशों के बावजूद पैरवी के लिए महाधिवक्ता उपस्थित नहीं हो रहे हैं। कोर्ट ने आदेश दिया कि सरकार 27 मार्च तक ऊंटों की घटती संख्या और उसके संरक्षण के प्रयासों की स्थिति स्पष्ट करे।
न्यायाधीश पुष्पेन्द्र सिंह भाटी व न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने स्वप्रेरणा से दायर याचिका पर यह आदेश दिया। अदालत ने कानून में संशोधन के बाद ऊंटों की संख्या में गिरावट पर भी चिंता जताई।
न्यायमित्र अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने बताया कि अदालती आदेशों के बावजूद न महाधिवक्ता पैरवी के लिए आ रहे हैं और न ही सरकार इस ओर पर्याप्त ध्यान दे रही है। ऊंटों की हाल की वर्षों में कोई सही गणना नहीं हुई है। कानून के अनुसार सरकार ने कलक्टर को नोडल एजेंसी बना रखा है, जिससे ऊंटों को चराने के लिए अनुमति लेना भी मुश्किल हो गया है।
सांख्यिकी के अनुसार वर्ष 2004 में प्रदेश में साढ़े सात लाख ऊंट थे। वर्ष 2015 में कानून बनने पर यह संख्या घटकर 3.26 लाख रह गई। इसके चार साल बाद यह 2.13 लाख पर आ गई। वर्ष 2021 में ऊंटों की संख्या लगभग डेढ़ लाख रह गई। ऊंटों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध के कारण पशु मेलों में इनकी बिक्री बंद हो गई है और पालकों में इसे पालने की रुचि भी कम हो गई है।



