फतेहाबाद, 10 मार्च।
केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए जाने वाले बिजली संशोधन अधिनियम 2025 के खिलाफ मंगलवार को बिजली कर्मचारियों ने फतेहाबाद में विरोध जताया। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ एम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स और ईईएफआई के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर, ऑल हरियाणा पावर कॉर्पोरेशन वर्कर यूनियन की राज्य कार्यकारिणी के निर्देशानुसार फतेहाबाद की सभी सब-यूनिटों में कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता सिटी प्रधान संजय कुमार ने की, जबकि मंच का संचालन सब-अर्बन कैशियर विकास शर्मा द्वारा किया गया।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बिजली संशोधन बिल को तत्काल वापस लेने की मांग की। यूनिट सचिव रामनिवास शर्मा ने कहा कि सरकार इस बिल के माध्यम से बिजली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को निजी पूंजीपतियों के हाथों में सौंपना चाहती है। बिजली कोई निजी वस्तु नहीं बल्कि अनिवार्य सार्वजनिक सेवा है। यह बिल सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर करने और कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुँचाने का स्पष्ट रोडमैप है।
रामनिवास शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि यह बिल लागू होता है, तो निजी कंपनियों के आने से बिजली दरों में भारी वृद्धि होगी। गरीब और किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी खत्म हो जाएगी। सरकारी नौकरियों के अवसर समाप्त होंगे और छंटनी का दौर शुरू होगा। सरकारी पावर कॉर्पोरेशन कमजोर होंगे, जिससे आम आदमी की बिजली तक पहुंच प्रभावित होगी। कर्मचारियों ने मांग की कि बिजली संशोधन विधेयक को तुरंत वापस लिया जाए। बिजली शुल्क कम करने के लिए कदम उठाए जाएं। राज्य डिस्कॉम और कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उत्पादन, पारेषण और वितरण में किसी भी प्रकार का निजीकरण या फ्रेंचाइजी मॉडल लागू न किया जाए।
प्रदर्शन को यूनियन के सुशील कुमार, सुरेश कुमार, हनुमान सिंह, धर्मबीर, सतपाल सिंह और विक्रम सिंह ने भी संबोधित किया और कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि आम उपभोक्ता और किसानों की भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इस जनविरोधी बिल को वापस नहीं लेती, आंदोलन और तेज किया जाएगा।



