9 मार्च 2026, नई दिल्ली
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में बताया कि भारत ने मानवीय आधार पर एक ईरानी नौसैनिक जहाज को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी थी। उन्होंने इस फैसले को “सही कदम” बताते हुए कहा कि संकट की स्थिति में मदद करना आवश्यक था।
यह बयान उन्होंने राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चर्चा के दौरान दिया। इस क्षेत्र में हाल के दिनों में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच सीधे सैन्य टकराव की स्थिति बन गई है।
संघर्ष की पृष्ठभूमितनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ईरान पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई की 28 फरवरी को मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल से जुड़े लक्ष्यों पर हमले किए।
ईरानी जहाज को भारत में मिली अनुमतिसंसद में बोलते हुए जयशंकर ने विशेष रूप से ईरानी जहाज आईआरआईएस लावन के मामले का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ईरान की ओर से 28 फरवरी को क्षेत्र में मौजूद तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर रुकने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था।
भारत ने 1 मार्च को इस अनुरोध को मंजूरी दी। इसके बाद आईआरआईएस लावन 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा। इस जहाज पर सवार लगभग 183 नाविकों को फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में रखा गया है।
जयशंकर ने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री ने इस मानवीय कदम के लिए भारत का आभार भी जताया है।
तकनीकी खराबी के कारण मांगी मददबताया गया कि आईआरआईएस लावन क्षेत्रीय समुद्री क्षेत्र में संचालन के दौरान तकनीकी खराबी का सामना कर रहा था। इसी वजह से जहाज ने जरूरी तकनीकी जांच और रसद सहायता के लिए तत्काल बंदरगाह पर रुकने की अनुमति मांगी थी।
यह जहाज फरवरी में विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और मिलन 2026 बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भी शामिल हुआ था। फिलहाल तकनीकी जांच पूरी होने तक जहाज कोच्चि में ही लंगर डाले हुए है।
उसी दिन डूबा एक और ईरानी जहाजदिलचस्प बात यह है कि जिस दिन आईआरआईएस लावन को कोच्चि में रुकने की अनुमति मिली, उसी दिन एक अन्य ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना हिंद महासागर में डूब गया।
यह जहाज श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास गॉल से लगभग 40 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो से निशाना बना।
श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार इस घटना में कम से कम 87 लोगों के शव बरामद किए गए, जबकि 32 नाविकों को जीवित बचाया गया और उनका गॉल में इलाज किया गया। कई अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने टॉरपीडो से किसी दुश्मन जहाज को डुबोया है।
तीसरे जहाज को श्रीलंका में मिली अनुमतिएक अन्य ईरानी जहाज आईआरआईएस बुशेहर को भी इंजन में खराबी की समस्या आई थी। यह जहाज श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र के बाहर रुका था और बाद में उसे वहां के बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी गई, जहां श्रीलंका के अधिकारियों ने उसे अपने नियंत्रण में लिया।
भारतीय नागरिकों के लिए जारी चेतावनीविदेश मंत्री के अनुसार भारत सरकार ने पहले ही ईरान की यात्रा को लेकर कई चेतावनियां जारी की थीं।
विदेश मंत्रालय ने 5 जनवरी को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी थी। इसके बाद 14 जनवरी को और सख्त सलाह जारी की गई। इसी दिन नौवहन महानिदेशालय ने भी भारतीय नाविकों को दूतावास के निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक जहाज संचालन से बचने को कहा था।
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 14 फरवरी और 23 फरवरी को भी सलाह जारी करते हुए छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों सहित सभी भारतीय नागरिकों से जल्द से जल्द उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने की अपील की थी। साथ ही जरूरत पड़ने पर 24 घंटे सक्रिय हेल्पलाइन से संपर्क करने को कहा गया था।



