नई दिल्ली, 09 मार्च
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में संघर्ष तेज होने के बाद से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते आपूर्ति बाधित होने और कुवैत तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन घटाने के कारण तेल के भाव तेजी से ऊपर चले गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। पिछले एक सप्ताह के दौरान इसमें 55 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी तेजी के कारण ब्रेंट कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल भी 113 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पर कारोबार करता नजर आया। कारोबार के दौरान ब्रेंट कच्चे तेल ने 107.92 डॉलर प्रति बैरल से शुरुआत कर कुछ ही समय में 119.14 डॉलर प्रति बैरल का स्तर छू लिया।
भारतीय समयानुसार सुबह 11 बजे ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 22.88 डॉलर यानी करीब 24.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 115.57 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल 22.75 डॉलर यानी लगभग 25.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 113.65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। वायदा बाजार में भी दोनों प्रमुख कच्चे तेल सूचकांकों में तेज उछाल देखा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस उछाल की एक बड़ी वजह तेल ढांचे पर लगातार हो रहे हमले भी हैं। अमेरिका और इजराइल ने ईरान के तेल ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन के तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इन घटनाओं से पूरे पश्चिम एशिया के तेल ढांचे पर दबाव बढ़ गया है।
तनाव के बीच पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन और उसके सहयोगी देशों के समूह में शामिल इराक ने अपने तीन प्रमुख दक्षिणी तेल क्षेत्रों से उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत की कटौती कर दी है। पहले इन क्षेत्रों से प्रतिदिन करीब 43 लाख बैरल उत्पादन होता था, जो अब घटकर लगभग 13 लाख बैरल रह गया है। कुवैत ने भी उत्पादन कम करने का संकेत दिया है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो वैश्विक आपूर्ति प्रभावित रह सकती है। इसका असर उन देशों पर अधिक पड़ेगा जो तेल आयात पर निर्भर हैं। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, जबकि जापान भी अपनी पेट्रोलियम आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है।
कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने से भारत के आयात बिल में भारी वृद्धि की आशंका है। इससे देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। यदि कीमतों में तेजी जारी रही, तो देश में पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं। साथ ही अधिक कीमत पर आयात करने के कारण विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय संतुलन पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।



