नई दिल्ली, 10 फरवरी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत में सुभाषित साझा कर शक्ति, संकल्प, तेज और समृद्धि की कामना का संदेश दिया है। उन्होंने धरती माता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कृषि, कल्याण और पोषण को मानव जीवन का आधार बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर यह सुभाषित साझा करते हुए लिख-
अस्मे वोऽअस्त्विन्द्रियमस्मे नृम्णमुत क्रतुरस्मे वर्चांसि सन्तु वः।नमो मात्रे पृथिव्यै नमो मात्रै पृथिव्याऽ… कृष्यै त्वा क्षेमाय त्वा रय्यै त्वा पोषाय त्वा॥
सुभाषित के माध्यम से प्रधानमंत्री ने कहा कि मानव जीवन में शक्ति, साहस, पुरुषार्थ और दृढ़ संकल्प का होना आवश्यक है। व्यक्ति में तेज और आत्मबल बना रहना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मानव प्रगति धरती के सम्मान, संरक्षण और प्रकृति के संतुलन से जुड़ी हुई है, जिससे समाज का समग्र कल्याण संभव हो पाता है।
प्रधानमंत्री ने धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कृषि, समृद्धि, कल्याण और पोषण की कामना की है। इस सुभाषित के जरिए उन्होंने सामर्थ्य, पुरुषार्थ और दृढ़ संकल्प के महत्व को रेखांकित किया।



