नई दिल्ली, 12 मार्च।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 129 के तहत मुस्लिम समुदाय के लोगों को संपत्ति गिफ्ट (हिबा) पर मिलने वाली रजिस्ट्रेशन और स्टांप ड्यूटी छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वे अपना पक्ष विधि आयोग के सामने रखें, जो कानून में आवश्यक बदलावों की सिफारिश कर सकता है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “75 साल बाद आपको लगा कि यह कानून संविधान का उल्लंघन करता है, आप विधि आयोग जाएँ, वे इस पर विचार करेंगे।“ याचिका वकील हरिशंकर जैन और निवेदिता शर्मा ने दायर की थी।
याचिका में तर्क दिया गया कि इस धारा के तहत मुस्लिम कानून के तहत दिए गए हिबा पर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प ड्यूटी की आवश्यकता नहीं होती। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह छूट सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाती है, समानता के मूल अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन करती है और संपत्ति विवाद बढ़ाती है।



