रायपुर, 27 फरवरी 2026।
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे 120 पूर्व नक्सलियों ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को करीब से देखा। इस पहल का उद्देश्य पूर्व नक्सलियों को लोकतंत्र और मतदान की शक्ति से परिचित कराना बताया गया है।
विधानसभा पहुंचे आत्मसमर्पित नक्सलियों में 66 पुरुष और 54 महिलाएं शामिल थीं। इनमें नक्सल संगठन के पूर्व केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश, बसवा, चैतू, ललिता और राजू भी मौजूद रहे। संगठन के सामान्य सदस्यों को दर्शक दीर्घा में बैठाकर कार्यवाही दिखाई गई, जबकि केंद्रीय समिति स्तर के पूर्व नेताओं को अध्यक्षीय दीर्घा में बैठाकर सदन की कार्यवाही से अवगत कराया गया।
इस समूह में 25 लाख रुपये के इनामी और 2013 के झीरम घाटी हमले के कथित मास्टरमाइंड चैतू भी शामिल था, जिसने करीब 35 वर्ष जंगलों में बिताने के बाद नवंबर 2025 में आत्मसमर्पण किया था और अब सामान्य जीवन की ओर लौट चुका है। विधानसभा अध्यक्ष और सदन के सदस्यों ने सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों का स्वागत करते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने पर शुभकामनाएं दीं।
सरकार का मानना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं से सीधा परिचय पुनर्वास प्रक्रिया को मजबूत बनाने में सहायक होगा। उप मुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन को बताया कि अब तक प्रदेश में 2937 नक्सली पुनर्वास नीति का लाभ लेकर मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। उन्होंने इस दिन को छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में हिंसा छोड़कर लौटने वालों का सम्मान होना चाहिए।
विधानसभा भ्रमण से पहले गुरुवार रात उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने निवास पर आत्मसमर्पित नक्सलियों के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया, जहां उनसे संवाद कर पुनर्वास और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई।



