मधेपुरा, 12 फरवरी।
देशव्यापी भारत बंद के आह्वान का असर गुरुवार को मधेपुरा में साफ दिखाई दिया। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के समर्थन में मजदूरों और कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। शहर के भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के सामने ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और वाम दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया।
प्रदर्शनकारी हाथों में लाल झंडे और मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे। आंदोलन का नेतृत्व एक्टू सहित देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, विभिन्न सेवा संघों और फेडरेशनों ने किया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग चारों लेबर कोड को निरस्त करने की रही। उनका कहना था कि ये श्रम संहिताएं मजदूर हितों के विपरीत हैं और इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर पड़ रहे हैं।
यूनियनों ने आरोप लगाया कि नए लेबर कोड लागू होने से कार्य घंटे बढ़ेंगे, रोजगार की सुरक्षा समाप्त होगी और संगठित व असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों का शोषण बढ़ेगा। भारत बंद के कारण जिले में बैंकिंग, बीमा, बिजली, परिवहन, स्वास्थ्य, गैस और जलापूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की गई।
हालांकि प्रशासन ने जरूरी सेवाओं को चालू रखने के प्रयास किए। बैंकिंग क्षेत्र में आंशिक असर देखने को मिला और कुछ स्थानों पर काम प्रभावित रहा। प्रदर्शन में वाम दलों के कार्यकर्ता, अखिल भारतीय किसान सभा, भाकपा माले सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर ने सभा को संबोधित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रही है और मजदूरों व किसानों की आवाज दबाई जा रही है। उनका आरोप था कि कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने के लिए श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है, जिसका देशभर में विरोध हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान गणेश मानव, रामचंद्र दास, मो. वसीमुद्दीन उर्फ नन्हें सहित अन्य नेताओं ने भी अपने विचार रखे और कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।



