उत्तर प्रदेश
16 Mar, 2026

बदलती जीवनशैली में बढ़ रहा अवसाद, अकेलापन बन रहा सबसे बड़ा कारण

प्रयागराज में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि तेज रफ्तार जीवनशैली और एकल परिवार व्यवस्था के कारण अवसाद की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे बचाव के लिए रिश्तों और सामाजिक जुड़ाव को महत्व देना जरूरी है।

प्रयागराज, 16 मार्च।

भारत में अवसाद की समस्या तेजी से गंभीर रूप लेती जा रही है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, काम का लगातार बढ़ता दबाव और असफलता की चिंता कई बार व्यक्ति को मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति तक पहुंचा देती है। लगातार उदासी महसूस होना, थकान, सुस्ती, नींद न आना, खुद को बेकार समझना और मन में आत्महत्या जैसे विचार आना अवसाद के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।

ये बातें सोमवार सुबह एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण तथा प्राकृतिक संस्थान प्रयागराज रेकी केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में स्पर्श चिकित्सक सतीश राय ने लोगों को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अवसाद के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसका सबसे बड़ा कारण अकेलापन है। भारत में संयुक्त परिवार व्यवस्था धीरे-धीरे कम हो रही है और एकल परिवार तेजी से बढ़ रहे हैं।

एकल परिवार में स्वतंत्रता तो अधिक होती है, लेकिन छोटी-छोटी परेशानियां, असफलता, तनाव और भविष्य की चिंता व्यक्ति को मानसिक दबाव में डाल देती है, जिससे अवसाद की स्थिति बन सकती है। इसके विपरीत संयुक्त परिवार में कई पीढ़ियां एक साथ रहती हैं, जहां आर्थिक सुरक्षा के साथ भावनात्मक सहयोग भी मिलता है। इससे व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस करता है और अकेलापन कम महसूस होता है। अनुभव के आधार पर लिए गए निर्णयों से पूरे परिवार में संतुलन और खुशी बनी रहती है।

सतीश राय ने कहा कि एकल परिवार में रहने वाले लोग, जिनमें केवल पति, पत्नी और बच्चे शामिल होते हैं, अक्सर छोटी-छोटी बातों या असफलताओं के कारण मानसिक रूप से प्रभावित हो जाते हैं। कार्यस्थल, परिवार या व्यवसाय में छोटी नोकझोंक या असफलता व्यक्ति को अलग-थलग महसूस कराती है और यही स्थिति धीरे-धीरे अवसाद की शुरुआत बन सकती है।

उन्होंने बताया कि अकेलापन एक ऐसी अदृश्य बीमारी है जो धीरे-धीरे लोगों को मानसिक रूप से कमजोर बना देती है। यह शरीर और मन दोनों के लिए हानिकारक है और एक प्रकार से जीवन का मौन शत्रु बन जाता है। रिश्तों में बढ़ती दूरी, सफलता की अंधी दौड़ और एकल परिवार व्यवस्था इस समस्या को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग नब्बे प्रतिशत लोग अकेलेपन की भावना के कारण अवसाद का शिकार हो जाते हैं, जो कई बार आत्महत्या जैसे गंभीर कदम का कारण बनता है।

सतीश राय ने कहा कि जिस प्रकार शारीरिक बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल जाया जाता है, उसी प्रकार मानसिक समस्याओं का भी समय पर उपचार आवश्यक है। इससे बचाव के लिए पति-पत्नी और बच्चों के साथ अन्य पारिवारिक रिश्तों को भी समय देना चाहिए, दोस्तों और सामाजिक संबंधों से जुड़ाव बनाए रखना चाहिए, ध्यान और सकारात्मक गतिविधियों को अपनाना चाहिए तथा जीवन में प्रसन्न रहने का प्रयास करना चाहिए।

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