पश्चिम बंगाल
16 Mar, 2026

रूपनारायण नदी में फिर लौटी हिलसा की चहल, ड्रेजिंग के बाद मछुआरों को मिली राहत

पूर्व मेदिनीपुर के कोलाघाट क्षेत्र में रूपनारायण नदी की ड्रेजिंग के बाद हिलसा मछलियों के झुंड फिर दिखाई देने लगे हैं। इससे स्थानीय मछुआरों में उत्साह बढ़ा है और अच्छी आमदनी की उम्मीद जगी है।

पूर्व मेदिनीपुर, 16 मार्च।

जिले के कोलाघाट इलाके में रूपनारायण नदी में किए गए ड्रेजिंग कार्य का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। सोमवार सुबह स्थानीय मछुआरों से मिली जानकारी के अनुसार बरसात शुरू होने से पहले ही नदी में हिलसा मछलियों के झुंड दिखाई देने लगे हैं, जिससे इलाके के मछुआरों के बीच खुशी का माहौल है।

स्थानीय मछुआरों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से नदी की गहराई बढ़ाने के लिए लगातार ड्रेजिंग का काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का परिणाम यह हुआ है कि समुद्र की ओर से हिलसा मछलियों के झुंड फिर से नदी के भीतर आने लगे हैं।

मछुआरों का कहना है कि इस समय एक नाव में प्रतिदिन औसतन आठ से दस किलो तक हिलसा मछली पकड़ी जा रही है। बाजार में इस मछली की कीमत लगभग चौदह सौ से सोलह सौ रुपये प्रति किलो तक मिल रही है, जिससे मछुआरों की आमदनी में भी बढ़ोतरी की संभावना बनी है।

स्थानीय वरिष्ठ मछुआरे अनादि मुदी ने बताया कि नदी में गाद जमा होने और बढ़ते प्रदूषण के कारण पिछले कई वर्षों से रूपनारायण नदी में हिलसा मछली लगभग समाप्त हो गई थी। इसके कारण अनेक मछुआरों को मजबूरी में अन्य कार्यों की तलाश करनी पड़ी थी।

मछली व्यवसायी अनूप नाथ ने जानकारी दी कि हाल के दिनों में उनकी नाव से लगभग दस से पंद्रह किलो तक हिलसा मछली पकड़ी जा रही है। उन्होंने बताया कि एक मछली का वजन लगभग एक से एक दशमलव दो किलो के बीच होता है।

पूर्व मत्स्य अधिकारी सुरजीत बाग के अनुसार रूपनारायण नदी में जू-प्लैंकटन और फाइटो-प्लैंकटन पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं, जो हिलसा मछली का प्रमुख भोजन हैं। ड्रेजिंग के बाद नदी की गहराई बढ़ने से हिलसा के झुंड के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो गया है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि नदी की सफाई और ड्रेजिंग का कार्य इसी प्रकार लगातार चलता रहा, तो आने वाले समय में कोलाघाट क्षेत्र की हिलसा मछली की पुरानी पहचान और प्रसिद्धि फिर से लौट सकती है।

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