नई दिल्ली।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में सामने आए 590 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले पर सतर्कता बरतते हुए स्थिति की निगरानी करने की बात कही है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह मामला चिंता का विषय है, लेकिन इससे बैंकिंग प्रणाली पर किसी तरह का व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियामक संस्था किसी एक बैंक विशेष पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचती है, हालांकि विकास संबंधी घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने बताया कि यह धोखाधड़ी बैंक कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत से हरियाणा सरकार के खातों में की गई। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक ग्राहक समूह तक सीमित है और इसे सिस्टम की रिपोर्टिंग त्रुटि नहीं माना जा सकता।
हरियाणा सरकार ने मामले के बाद कड़ी कार्रवाई करते हुए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ-साथ एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को भी सरकारी बैंकिंग कार्यों की सूची से बाहर कर दिया है। मामले की जांच जारी है।



