मेदिनीपुर, 11 मार्च।
पश्चिम मेदिनीपुर जिले में भारतीय जनता पार्टी की ‘परिवर्तन संकल्प यात्रा’ को लेकर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। जिले के अलग-अलग इलाकों से गुजर रही इस यात्रा ने आगामी चुनाव से पहले क्षेत्र का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। भाजपा जहां इसे जनता के बढ़ते समर्थन का प्रतीक बता रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे पूरी तरह असफल बताने में जुटी है।
परिवर्तन संकल्प यात्रा के जरिए भाजपा अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। रथ यात्रा और जनसभाओं के इस अभियान में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और राहुल सिन्हा जैसे प्रमुख नेता लगातार जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं। इसी दौरान कुर्मी समाज के प्रभावशाली नेता राजेश महतो का भाजपा में शामिल होना भी क्षेत्रीय सामाजिक समीकरणों की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
जनसभाओं के दौरान भाजपा नेताओं ने कई लोक-लुभावन घोषणाएं भी की हैं। इनमें ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की राशि बढ़ाकर तीन हजार रुपये करने, किसानों को हर वर्ष 18 हजार रुपये की सहायता देने तथा शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने जैसे संकल्प प्रमुख रूप से शामिल हैं।
वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के इन दावों पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि भाजपा की सभाओं में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट रही है, जो यह दर्शाता है कि बंगाल की जनता ने इस यात्रा को स्वीकार नहीं किया है। पुलिस रिपोर्टों का हवाला देते हुए तृणमूल नेताओं ने दावा किया कि अधिकांश कार्यक्रमों में लोगों की उपस्थिति बेहद कम रही है।
हालांकि भाजपा नेतृत्व का कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करना है। नारायणगढ़ के नेता गौरिशंकर अधिकारी और अरूप दास का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में इस यात्रा से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा हुआ है और कई स्थानों पर लोग देर रात तक रथ के आगमन का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं।
इधर, जवाबी रणनीति के तहत तृणमूल कांग्रेस के घाटाल संगठनात्मक जिला अध्यक्ष अजीत माइती ने भाजपा पर मतदाताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। भाजपा की इस यात्रा के जवाब में तृणमूल ने भी प्रतिरोध मार्च और जुलूस निकालने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जिले के भीतर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। दोनों ही दल अब इस यात्रा के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की होड़ में लगे हुए हैं।



