धर्म / अध्यात्म
16 Mar, 2026

नवरात्रि का पहला रहस्य: माँ शैलपुत्री की दिव्य कथा

नवरात्रि के पहले दिन पूजी जाने वाली माँ शैलपुत्री कौन हैं? जानिए उनका जन्म, देवी सती से संबंध, भगवान शिव की कथा और उनके पूजन का आध्यात्मिक महत्व।

नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हें नवदुर्गा का पहला स्वरूप माना जाता है और नवरात्रि की आराधना का आरंभ भी इसी रूप से होता है। देवी का यह स्वरूप शक्ति, धैर्य और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार माँ शैलपुत्री का संबंध सती से बताया जाता है। मान्यता है कि सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था। एक बार उनके पिता दक्ष प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन इस यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया।

कथा के अनुसार सती बिना निमंत्रण के अपने पिता के यज्ञ में पहुँच गईं। वहाँ भगवान शिव का अपमान होते देख वे अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गईं। अपमान सहन न कर पाने के कारण उन्होंने उसी यज्ञ की अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया। इस घटना से शिव अत्यंत व्यथित हुए और उन्होंने क्रोध में आकर तांडव किया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सती ने अगले जन्म में हिमालय पर्वत के राजा के घर जन्म लिया। इसी कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा, जिसका अर्थ है “पर्वत की पुत्री”। इस रूप में उन्होंने फिर से भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की।

माँ शैलपुत्री को सामान्यतः वृषभ अर्थात बैल पर सवार दिखाया जाता है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है। यह रूप साहस, शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालु माँ शैलपुत्री की पूजा कर अपने जीवन में शक्ति, धैर्य और शुभ आरंभ की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन देवी की आराधना से साधना का पहला चरण प्रारंभ होता है और भक्तों को मानसिक स्थिरता तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

इसी कारण नवरात्रि का पहला दिन माँ शैलपुत्री की पूजा से आरंभ होता है, जो देवी शक्ति के उस रूप का स्मरण कराता है जहाँ से नवरात्रि की आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत मानी जाती है।

|
आज का राशिफल

पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। किसी से कहा सुनी न हो यही ध्यान रहे। अपना कार्य दूसरों के सहयोग से बना लेंगे। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। शुभांक-1-4-6

आज का मौसम

भोपाल

16° / 26°

Rainy

ट्रेंडिंग न्यूज़

मुख्यमंत्री डॉ. यादव नेपानगर में 127 विकास कार्यों की सौगात के साथ जनजातीय सम्मेलन में हुए शामिल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में 127 विकास कार्यों की सौगात दी और जनजातीय सम्मेलन में किसानों और जनप्रतिनिधियों से योजनाओं का परिचय साझा किया।

ट्रंप ने नाटो को होर्मुज सुरक्षा में सहयोग का दिया कड़ा संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी कि यदि नाटो होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद नहीं करता तो इसका भविष्य बहुत बुरा होगा।

श्रीनगर में एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन का उद्घाटन, उमर अब्दुल्ला ने किया लोकार्पण

कश्मीर में वसंत ऋतु के आगमन के अवसर पर श्रीनगर में एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन का उद्घाटन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने किया और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री मोदी से की सौजन्य भेंट, किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों से कराया अवगत

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर किसान कल्याण वर्ष के तहत प्रदेश में हो रहे कार्यक्रमों और विकास प्रयासों से अवगत कराया।

१५ मार्च की एकादशी: वह रात जब आस्था, संयम और ब्रह्मांडीय समय एक साथ आते हैं

१५ मार्च की पापमोचनी एकादशी केवल व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का दिन मानी जाती है—मान्यता है कि इस दिन का उपवास पुराने कर्मों को हल्का कर देता है।