दिल्ली-एनसीआर
28 Feb, 2026

डीयू दीक्षांत में 1.20 लाख विद्यार्थियों को डिग्री, उपराष्ट्रपति ने दिया राष्ट्र प्रथम का संदेश

दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1 लाख से अधिक विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कर उपराष्ट्रपति ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाने की अपील की।

नई दिल्ली, 28 फरवरी 2026।

दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1 लाख 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को डिजिटल डिग्रियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने युवाओं से राष्ट्रहित को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिग्री केवल प्रमाणपत्र नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक होती है। समारोह में बड़ी संख्या में शोधार्थियों और मेधावी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।

दीक्षांत समारोह में 1,20,408 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं, जबकि 734 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि मिली। इसके साथ ही 132 स्वर्ण एवं रजत पदक और अन्य पुरस्कार भी वितरित किए गए। उपराष्ट्रपति ने दस प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से पदक प्रदान किए और ‘बुक ऑफ हाइलाइट्स’ का विमोचन भी किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की 104 वर्ष की गौरवपूर्ण यात्रा का उल्लेख करते हुए इसकी शैक्षणिक उपलब्धियों पर संतोष व्यक्त किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 1922 में मात्र तीन कॉलेज, दो संकाय, आठ विभाग और 750 विद्यार्थियों के साथ शुरू हुआ यह संस्थान आज 16 संकाय, 86 विभाग, 90 कॉलेज, 20 हॉल एवं छात्रावास, 30 से अधिक केंद्र और संस्थान, 34 पुस्तकालय तथा छह लाख से अधिक विद्यार्थियों के साथ वैश्विक पहचान बना चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में निरंतर सुधार को शैक्षणिक उत्कृष्टता का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा कि दीक्षांत केवल शैक्षणिक समापन नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत है। आज के युवा ऐसे समय में जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं जब तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक लोकतांत्रिक चुनौतियां दुनिया की व्यवस्था बदल रही हैं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

उपराष्ट्रपति ने ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने पर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आर्थिक स्वावलंबन नहीं बल्कि नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना भी है। उन्होंने छात्रों से किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने का आह्वान किया।

उन्होंने महिला शिक्षा की प्रगति पर खुशी जताते हुए बताया कि इस वर्ष 50 प्रतिशत से अधिक स्नातक और 70 प्रतिशत से अधिक स्वर्ण पदक विजेता महिलाएं हैं, जो देश में महिला शिक्षा के विस्तार का संकेत है। उन्होंने छात्रों से नशे से दूर रहने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने की सलाह दी।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय ने द्वितीय विश्व युद्ध और कोविड-19 जैसी चुनौतियों के बावजूद हर वर्ष दीक्षांत आयोजित कर शैक्षणिक परंपरा को बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि यह देश हमारा है और इसकी प्रगति की जिम्मेदारी भी हमें ही निभानी होगी। उन्होंने विश्वविद्यालय के ध्येय वाक्य ‘निष्ठा धृति: सत्यम्’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ को जीवन का मार्गदर्शक बनाने का संदेश दिया।

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