07 मार्च, गुवाहाटी।
असम में विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगी हैं। इस बीच भाजपा और कांग्रेस अपने गठबंधनों को मजबूत करने के प्रयास में हैं। लेकिन कांग्रेस को विपक्षी गठबंधन बनाने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पहले विपक्ष में लगभग 10 पार्टियां थीं, लेकिन अब गठबंधन मुख्य रूप से चार पार्टियों तक सीमित नजर आ रहा है।
कांग्रेसी गठबंधन पर असफलता के बाद रायजोर दल के प्रमुख और शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “सर्वशेष्ठ चेष्टाओ व्यर्थ” यानी “आखिरी कोशिश भी विफल।” इस पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में कांग्रेस गठबंधन की स्थिति पर अटकलों को बढ़ा दिया।
अखिल गोगोई के इस बयान के समय कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने पूरे राज्य में संयुक्त प्रचार अभियान की घोषणा की थी।
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष एवं सांसद गौरव गोगोई ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पार्टी अभी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट), असम जातीय परिषद और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस के साथ मिलकर एक बड़ा विपक्षी मोर्चा बनाने पर काम कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि रायजोर दल समेत अन्य पार्टियों के साथ बातचीत जारी है और उम्मीद है कि गठबंधन और बढ़ेगा। हालांकि, सीट-बंटवारे को लेकर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। कांग्रेस ने पहले ही 42 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
गठबंधन में शामिल अन्य दलों के नेता भी एकजुटता का संदेश दे रहे हैं। एजेपी अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने कहा कि चारों पार्टियां भाजपा को हराने के लिए एकजुट हैं। सीपीआई (एम) राज्य सचिव सुप्रकाश तालुकदार ने गठबंधन को एक “अच्छी शुरुआत” बताया और एपीएचएलसी प्रमुख जोन्स इंग्ती कथार ने इसे पहाड़ी इलाकों में जनता की समस्याओं को दूर करने के प्रयास के रूप में बताया।
असम विधानसभा में कुल 126 सदस्य हैं। वर्तमान में भाजपा के पास 64 सीटें हैं, उसके सहयोगी दलों – असम गण परिषद, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के पास क्रमशः 9, 7 और 3 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 26 विधायक हैं, एआईयूडीएफ के पास 15, सीपीआई(एम) के पास 1 और एक निर्दलीय विधायक है।



