अमेरिका ने टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है, जो पिछले साल 27 अगस्त से लागू हुई थी। यह व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों को चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के निर्यात में भी बढ़त देगा, क्योंकि इन देशों को अधिक टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।
गुप्ता एक्सपोर्ट के निदेशक रामनिवास गुप्ता ने बताया कि पानीपत का वार्षिक कारोबार 60 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें से लगभग 38 से 40 हजार करोड़ रुपए का घरेलू व 18 से 20 हजार करोड़ रुपये का निर्यात का उत्पादन होता है व कुल निर्यात का लगभग 60% व्यापार अमेरिका के साथ होता है। उन्होने बताया कि पिछले साल अप्रैल में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। बाद में बातचीत के बाद इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया था, लेकिन, उन्होंने 1 अगस्त से भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने और 27 अगस्त से रूसी कच्चे तेल के आयात पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत जुर्माना लगाने के फैसले से निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। जिस कारण पानीपत का निर्यात उद्योग लगभग न के बराबर रह गया था लेकिन अब नए फैसले से निर्यात उद्योग को तीव्र गति मिलेगी ।
निर्यातक व हरियाणा एनवायरमेंट मैनेजमेंट सोसायटी के स्टेट प्रेसिडेंट भीम राणा ने बताया कि अमेरिका के इस फैसले ने पानीपत निर्यात उद्योग को फिर से जीवित कर दिया है, जो निर्यात 18 से 20 हजार करोड़ रुपए से घटकर कुल 12 हजार करोड़ रुपए रह गया था । अब निर्यात उद्योग की गति के साथ कामगारों को भी फिर से रोजगार मिलेगा।
पानीपत निर्यातक संघ के उपाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि व्यापार समझौते से कपड़ा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि 60% कारोबार अमेरिकी बाजारों के साथ होता है। उन्होंने आगे कहा कि टैरिफ 18 प्रतिशत तय किया गया है, जिससे अन्य देशों की तुलना में भारत को बढ़त मिलेगी। हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, पानीपत के अध्यक्ष विनोद धामिजा ने कहा कि 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण पानीपत के लगभग 60% निर्यात पर असर पड़ा था, लेकिन टैरिफ कम होने से निर्यातकों को अब मुनाफा होगा।



