कोलकाता, 28 फरवरी 2026।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिन राजीव कुमार के लिए पहले सीबीआई के खिलाफ धरना दिया था, अब उन्हीं को तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। सेवानिवृत्ति के बाद उनके सक्रिय राजनीति में प्रवेश को लेकर राजनीतिक हलकों में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
पूर्व डीजीपी राजीव कुमार 1989 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी रहे हैं। उनका जन्म 31 जनवरी 1966 को उत्तर प्रदेश के चंदौसी में हुआ था। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की थी। उनके दादा प्रोफेसर रामशरण को मुरादाबाद का गांधी भी कहा जाता था।
राजीव कुमार को राज्य के तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों में गिना जाता रहा है। उन्होंने दुर्गापुर में प्रभारी के रूप में सेवा शुरू की और बाद में बीरभूम सहित कई जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया। कोलकाता पुलिस की विशेष कार्यबल इकाई के प्रमुख रहते हुए उन्होंने उग्रवाद और आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2002 में कोलकाता स्थित अमेरिकी केंद्र पर हमले के मुख्य आरोपी आफताब अंसारी की गिरफ्तारी में भी उनकी भूमिका बताई जाती है।
वे बिधाननगर और बाद में कोलकाता पुलिस आयुक्त भी रहे। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में भी सेवाएं दीं। वर्ष 2013 के शारदा चिटफंड घोटाले की जांच के दौरान उनकी भूमिका विवादों में रही। उन पर आरोप लगा कि जांच के दौरान साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया ताकि मुख्य आरोपियों को बचाया जा सके।
फरवरी 2019 में सीबीआई की टीम उनसे पूछताछ के लिए उनके आवास पहुंची थी, जिसके बाद कोलकाता पुलिस द्वारा जांच एजेंसी के अधिकारियों को हिरासत में लेने की घटना से राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था। इसके विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई थीं। विपक्ष ने उन पर फोन टैपिंग के भी आरोप लगाए थे। हाल ही में ईडी की छापेमारी के दौरान उनके कार्यालय पहुंचने को लेकर भी राजनीतिक विवाद चर्चा में रहा।
तृणमूल कांग्रेस के इस फैसले को पार्टी के भीतर भरोसेमंद अधिकारी को राजनीतिक जिम्मेदारी देने के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले भी सार्वजनिक मंचों से उनकी प्रशंसा कर चुकी हैं। डीजीपी के रूप में उनका कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हुआ था। अब राज्यसभा उम्मीदवारी के साथ उनकी राजनीतिक भूमिका नए चरण में प्रवेश कर रही है।



