रांची, 24 फरवरी।
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान छात्रों द्वारा पढ़ाई बीच में छोड़ने की बढ़ती दर का मुद्दा सदन में गूंजा। विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि राज्य में नामांकन की संख्या में वृद्धि हो रही है, लेकिन 12वीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते कई छात्र पढ़ाई छोड़ दे रहे हैं, जो चिंता का विषय है।
इस पर जवाब देते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार का उत्तर स्पष्ट और तथ्यों पर आधारित है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पढ़ाई छोड़ने की दर 3.4 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सकल नामांकन अनुपात और पढ़ाई छोड़ने की दर दोनों अलग अवधारणाएं हैं। सकल नामांकन अनुपात कुल छात्रों के आधार पर निकाला जाता है, जबकि पढ़ाई छोड़ने की दर का आकलन कुल स्कूली छात्रों की संख्या के आधार पर किया जाता है।
पूरक प्रश्न में विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि संथाल परगना क्षेत्र में गरीब आदिवासी परिवार अपने बच्चों को मिशन स्कूलों में शुल्क देकर पढ़ाते हैं। ऐसे छात्रों को भी सरकार की योजनाओं—जैसे मध्याह्न भोजन और साइकिल—का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी विद्यालयों के भरोसे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर नहीं सुधर सकता, इसलिए निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को भी योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से 12 तक नामांकित छात्रों को निःशुल्क पुस्तकें, वर्दी और साइकिल उपलब्ध कराई जाती हैं। अल्पसंख्यक एवं निजी विद्यालयों के छात्रों को कुछ सुविधाएं दी जाती हैं, लेकिन वे सरकारी विद्यालयों के समान व्यापक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह नीतिगत विषय है और सरकार इस पर विचार कर उचित निर्णय लेगी।



