भोपाल, 14 मार्च 2026।
उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने पं. ख़ुशीलाल शर्मा शासकीय (स्वशासी) आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी "नेत्रम-2026" के समापन सत्र में अपने विचार साझा किए। श्री परमार ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और समृद्ध चिकित्सा पद्धति है, जिसे आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों के साथ जोड़कर वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जाना चाहिए।
मंत्री श्री परमार ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में प्रमाण-आधारित शोध, क्लिनिकल स्टडी और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने इंटीग्रेटेड मेडिकल केयर की आवश्यकता बताते हुए कहा कि विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय से आम जनता को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाया जा सकता है।
श्री परमार ने कहा कि क्रॉनिक बीमारियों तथा कैंसर जैसी जटिल व्याधियों पर शोध बढ़ाना समय की आवश्यकता है ताकि इनके प्रभावी एवं समन्वित उपचार विकसित किए जा सकें। उन्होंने संगोष्ठियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि इनसे प्राप्त निष्कर्ष और सुझाव समाज और चिकित्सा क्षेत्र में वास्तविक रूप से उपयोगी होने चाहिए।
मंत्री ने जोर दिया कि समस्त चिकित्सा विधाओं का एकमात्र लक्ष्य आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा होना चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा विधा को भारतीय दर्शन अनुरूप वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
दो दिवसीय संगोष्ठी में देश के 11 राज्यों से आयुर्वेद एवं आधुनिक नेत्र रोग विशेषज्ञों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। संगोष्ठी में आयुर्वेदिक नेत्र चिकित्सा में नवीन अनुसंधान, पारंपरिक ज्ञान और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय पर विचार-विमर्श किया गया।
उद्घाटन सत्र में स्मारिका का विमोचन किया गया, जिसमें 9 की-नोट व्याख्यान और 172 शोध सार प्रकाशित किए गए। दो दिवसीय कार्यक्रम में कुल 8 वैज्ञानिक सत्र और 2 प्लेनरी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें 120 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इसके अतिरिक्त 35 डिजिटल पोस्टर प्रस्तुतियाँ प्रदर्शित की गईं।
सत्रों में शालाक्य तंत्र, क्रियाकल्प चिकित्सा, साक्ष्य-आधारित आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियाँ और आधुनिक नेत्र विज्ञान के साथ आयुर्वेद के समन्वय पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान और विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक नेत्र चिकित्सा में नवीन अनुसंधान, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और आधुनिक तकनीकों के समन्वय पर बल दिया। संगोष्ठी के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और आशा जताई कि इस संगोष्ठी के माध्यम से प्राप्त ज्ञान और विचार-विमर्श आयुर्वेदिक नेत्र चिकित्सा के विकास और साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को नई दिशा देंगे।
समापन अवसर पर प्रमुख सचिव आयुष श्री शोभित जैन, कुलगुरु बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल श्री सुरेश कुमार जैन, आचार एवं पंजीयन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुश्रुत कनौजिया, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की प्राध्यापक डॉ. मंजूषा राजगोपाल, पं. ख़ुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. उमेश शुक्ला सहित विभिन्न राज्यों से पधारे विषयविद, शोधार्थी और प्राध्यापक उपस्थित रहे।



