कोलकाता, 12 मार्च 2026।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण ने लेपिडोप्टेरा वर्ग की लाइकेन पतंगों की दो नई प्रजातियों की खोज की है, जो कीट विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इसके साथ ही भारतीय हिमालय क्षेत्र से सात अन्य प्रजातियों का भी पहली बार दस्तावेजीकरण किया गया है।
संस्थान के गुरुवार सुबह जारी बयान में बताया गया कि यह शोध दो मार्च को एक अंतरराष्ट्रीय वर्गिकी शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने नई प्रजातियों का विस्तृत वैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत किया है।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की निदेशक डॉ. धृति बनर्जी ने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह खोज भारत में पतंगों की जैव विविधता के दस्तावेजीकरण में अहम योगदान देती है। उन्होंने कहा कि लेपिडोप्टेरा जैसे कम अध्ययन किए गए समूहों पर शोध पारिस्थितिकी तंत्र को समझने और हिमालयी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के संकेतक जीवों की पहचान के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह सफलता जैव विविधता वाले क्षेत्रों में निरंतर अनुसंधान की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
इस शोध दल में कोलकाता स्थित भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के वैज्ञानिक डॉ. नवनीत सिंह, जबलपुर के केंद्रीय क्षेत्रीय केंद्र के डॉ. संतोष सिंह और कोलकाता की शोधार्थी सृष्टि भट्टाचार्य शामिल हैं। इन प्रजातियों की पहचान सिक्किम के गोलितार और पश्चिम बंगाल के पानीझोरा क्षेत्र से एकत्र नमूनों के अध्ययन पर आधारित है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, नई प्रजातियों की पहचान उनके शरीर की बनावट, पंखों के रंग और पैटर्न, सूक्ष्म शारीरिक संरचनाओं और प्रजनन अंगों की विशेष संरचना के आधार पर की गई। उन्होंने बताया कि लाइकेन पतंग पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण हैं। इनके शिशु लाइकेन पर निर्भर रहते हैं, जो वायु प्रदूषण के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए ये पर्यावरण और वायु गुणवत्ता के प्राकृतिक संकेतक के रूप में भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।



