चेन्नई, 20 फरवरी।
तमिलनाडु विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि इसे शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक मायनों को लेकर कयास तेज हो गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ओपीएस के दोबारा अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) में शामिल होने की संभावना कम है। उन्होंने “अन्नाद्रमुक कार्यकर्ता अधिकार पुनर्प्राप्ति समिति” का नेतृत्व संभाला है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं की है। ओपीएस के कुछ समर्थक पहले ही द्रमुक में शामिल हो चुके हैं, जिससे इस मुलाकात का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है।
अन्नाद्रमुक गठबंधन में ओपीएस को शामिल करने के मामले में वरिष्ठ नेता एडप्पडी के. पलानीस्वामी ने हिचकिचाहट दिखाई है। इस कारण ओपीएस के आगामी राजनीतिक निर्णय को लेकर सियासी हलकों में उत्सुकता बनी हुई है। माना जा रहा है कि वे आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव को लेकर स्पष्ट कदम उठा सकते हैं।
इससे पहले विधानसभा के अंतिम दिन वित्त और कृषि के अंतरिम बजट पर जवाबी वक्तव्य दिए गए। वित्त मंत्री थंगम थेनारासु और कृषि मंत्री एम. आर. के. पन्नीरसेल्वम ने सदन में सरकार का पक्ष रखा। मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक के विधायक बहिष्कार करते हुए उपस्थित नहीं हुए। भाजपा और पट्टाली मक्कल कच्ची ने भी कार्यवाही का बहिष्कार किया।
जवाबी भाषण के बाद ओपीएस मुख्यमंत्री कक्ष में पहुंचे, जहां एम. के. स्टालिन और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन भी मौजूद थे। फिलहाल यह मुलाकात औपचारिक बताई जा रही है, लेकिन ओपीएस के भविष्य और संभावित नए राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।



