तिरुचिरापल्ली, 09 मार्च।
तमिलनाडु में चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है और इसी कड़ी में सोमवार को तिरुचिरापल्ली जिले के सिरुगनूर में द्रमुक के पदाधिकारियों का राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसे आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति और घोषणाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
“मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन जारी रहें, तमिलनाडु विजयी हो” शीर्षक के साथ आयोजित यह सम्मेलन दोपहर 3 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ शुरू हुआ। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन शाम करीब 5:30 बजे सम्मेलन स्थल पहुंचे और 110 फीट ऊंचे ध्वज स्तंभ पर द्रमुक का झंडा फहराकर उद्घाटन किया। मंच तक पहुंचने के लिए उन्होंने आधा किलोमीटर लंबा विशेष ‘रैंप’ मार्ग तय किया और कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार किया।
सम्मेलन की अध्यक्षता द्रमुक युवा विंग के सचिव और राज्य के उपमुख्यमंत्री उदयनीधि स्टालिन ने की, जबकि मंत्री के.एन. नेहरू ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने विचार रखे और विभिन्न प्रस्ताव पारित किए। अंत में मुख्यमंत्री स्टालिन ने मुख्य संबोधन दिया।
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी द्रमुक का राज्य सम्मेलन सिरुगनूर में ही आयोजित हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री स्टालिन ने महिलाओं के लिए प्रति माह 1,000 रुपये की अधिकार सहायता राशि सहित सात प्रमुख चुनावी वादे किए थे। इस बार भी सम्मेलन में कुछ अहम घोषणाओं और चुनावी वादों की संभावना जताई जा रही है।
मंत्री के.एन. नेहरू ने पत्रकारों से कहा कि सम्मेलन नए ऐलानों के साथ ऐतिहासिक साबित होगा और चुनावी घोषणा पत्र से जुड़ी घोषणाएं मुख्यमंत्री आज ही कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने पहले ही कहा था कि सम्मेलन में करीब 10 लाख पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। इसके लिए लगभग 650 एकड़ क्षेत्र में विशाल सम्मेलन स्थल तैयार किया गया, 50,000 वाहनों की पार्किंग व्यवस्था की गई और 9 प्रवेश द्वार बनाए गए। सम्मेलन में अत्याधुनिक एलईडी स्क्रीन, विशाल मंच, 110 फीट ऊंचा झंडा स्तंभ, भोजन और बैठने की सुविधा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
तमिलनाडु में जल्द ही मुख्य चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित कर सकता है। इस चुनाव में द्रमुक और अन्नाद्रमुक गठबंधन मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। नाम तमिलर कच्ची अकेले चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी है, जबकि तमिलगा वेत्त्री कज़गम का रुख अभी स्पष्ट नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, द्रमुक और अन्नाद्रमुक का गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। सत्तारूढ़ द्रमुक चुनावी दौड़ में आगे मानी जा रही है और सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।



