नई दिल्ली, 09 मार्च।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपितों को बरी करने के राऊज एवेन्यू ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी आरोपितों को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
उच्च न्यायालय ने सोमवार को ट्रायल कोर्ट की ओर से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पर की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर रोक लगा दी और आदेश दिया कि ट्रायल कोर्ट दिल्ली आबकारी घोटाला से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले की आगे सुनवाई न करे। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे दिल्ली के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया और ट्रायल कोर्ट के आदेश को कानून के अनुसार गलत बताते हुए रोक लगाने की मांग की।
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को सभी आरोपितों को बरी किया था। कोर्ट ने कहा था कि चार्जशीट में विरोधाभास हैं और हजारों पेजों की चार्जशीट में तथ्य गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते। कोर्ट ने बताया कि मनीष सिसोदिया इस मामले में करीब 530 दिन जेल में रहे जबकि अरविंद केजरीवाल दो बार के अंतराल में 156 दिन जेल में रहे। केजरीवाल 13 सितंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर रिहा हुए थे।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 मार्च, 2024 को केजरीवाल को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। उच्चतम न्यायालय ने 10 मई को उन्हें एक जून तक की अंतरिम जमानत दी थी, जिसके बाद 2 जून, 2024 को उन्होंने सरेंडर किया। इसके बाद 26 जून, 2024 को सीबीआई ने केजरीवाल को गिरफ्तार किया। ईडी ने 10 मई, 2024 को छठी पूरक चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें बीआरएस नेता के कविता, चनप्रीत सिंह, दामोदर शर्मा, प्रिंस कुमार और अरविंद सिंह को आरोपित बनाया गया। कोर्ट ने 29 मई को इस छठी पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया।
उच्चतम न्यायालय ने 27 अगस्त को के. कविता को सीबीआई और ईडी के मामलों में जमानत दी। इसके बाद 13 सितंबर, 2024 को केजरीवाल को सीबीआई मामले में नियमित जमानत मिली। इससे पहले 12 जुलाई, 2024 को ईडी के मामले में उन्हें अंतरिम जमानत दी गई थी।



