नई दिल्ली, 09 मार्च।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली शराब नीति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अधिकारियों के खिलाफ राउज़ एवेन्यू न्यायालय की कठोर टिप्पणियों के कुछ हिस्सों को स्थगित कर दिया। राउज़ एवेन्यू न्यायालय ने आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि सीबीआई केवल अप्रूवर के बयान पर आधारित कहानी बना रही है।
उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वराणा कांता शर्मा की पीठ ने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, तेलंगाना जागृति पार्टी की के. काविता और 20 अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किए, जिन्हें मामले में आरोपमुक्त किया गया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
सीबीआई के पक्षकार सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्च न्यायालय में कहा कि राउज़ एवेन्यू न्यायालय का आरोपमुक्ति आदेश "वास्तविक तथ्यों के विपरीत" है और इसमें जांच के दौरान जुटाए गए महत्वपूर्ण सबूतों की अनदेखी की गई है। उन्होंने इसे गंभीर भ्रष्टाचार मामले में "बिना सुनवाई बरी करने के समान" बताया।
उन्होंने बताया कि मामले में अप्रूवर को गवाह के रूप में न्यायालय में पेश नहीं किया गया, न ही उनका क्रॉस-एग्जामिनेशन हुआ, लेकिन उनकी अप्रूवरशिप न्यायालय द्वारा मान्यता प्राप्त है। सॉलिसिटर जनरल ने सबूतों का हवाला देते हुए कहा कि कई गवाहों के बयान और धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत दर्ज बयान इस कथित साजिश की रूपरेखा स्पष्ट करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विजय नायर, जिसे अदालत में राजनीतिक पार्टी का संचार प्रमुख बताया गया, की भूमिका में 19 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक की रिश्वत दी गई, और 44.50 करोड़ रुपये हवाला चैनलों के माध्यम से स्थानांतरित किए गए, जो गोवा में चुनावी गतिविधियों के लिए उपयोग किए गए।
तुषार मेहता ने यह भी कहा कि न्यायालय ने बार-बार पुष्टि की कमी का हवाला दिया, लेकिन आरोपमुक्ति की प्रक्रिया में यह आकलन समय से पहले किया गया, जबकि जांच रिकॉर्ड में पर्याप्त सबूत मौजूद थे।


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