09 मार्च।
उच्चतम न्यायालय पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। याचिकाकर्ताओं के वकील मेनका गुरुस्वामी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिका पर सुनवाई की मांग की, जिसके बाद कोर्ट ने 10 मार्च को सुनवाई करने का आदेश दिया।
याचिका में कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान याचिकाकर्ताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। याचिकाकर्ताओं के नाम पहले की वोटर लिस्ट में शामिल थे और उन्होंने पहले मतदान भी किया था, लेकिन उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किए गए। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा हालात में वे न्यायिक अधिकारियों के फैसलों पर अपील नहीं कर सकती, जिस पर मेनका गुरुस्वामी ने अपील स्वीकार्य होने की दलील दी।
उच्चतम न्यायालय ने 24 फरवरी को पश्चिम बंगाल में एसआईआर में दावे और आपत्तियों के निपटारे के लिए राज्य के बाहर के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस से कहा था कि वे इस काम में तीन साल के अनुभव वाले एडिशनल सिविल जजों के अलावा झारखंड और ओडिशा से भी न्यायिक अधिकारियों की तैनाती करें।
दरअसल, कलकत्ता उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि राज्य में ‘तार्किक विसंगति’ के 50 हजार से अधिक मामले हैं और उनका निपटारा करने के लिए न्यायिक अधिकारियों की कमी है। उच्च न्यायालय ने कहा कि इस काम के लिए करीब 250 न्यायिक अधिकारियों को 80 दिनों तक तैनात करना पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पश्चिम बंगाल से बाहर के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती पर होने वाला खर्च निर्वाचन आयोग वहन करेगा, जिसमें उनके यात्रा, ठहरने और मानदेय के खर्च शामिल होंगे।



