चेन्नई, 27 फरवरी 2026।
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम में शामिल होने का फैसला किया है। विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम को राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के वरिष्ठ नेता रहे ओ. पन्नीरसेल्वम ने पार्टी से अलग होकर डीएमके का दामन थाम लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की मौजूदगी में डीएमके की सदस्यता ग्रहण की। इससे पहले वे एआईएडीएमके के शीर्ष नेतृत्व में रह चुके हैं और तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। माना जा रहा है कि उनके इस फैसले से राज्य की राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
पिछले कुछ दिनों से एआईएडीएमके में अंदरूनी असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं। पन्नीरसेल्वम लगातार डीएमके के समर्थन में बयान दे रहे थे, जिससे उनकी नाराजगी की चर्चाएं तेज हो गई थीं। अप्रैल 2026 में संभावित विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनका यह कदम राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तमिलनाडु की राजनीति में मुख्य मुकाबला डीएमके और एआईएडीएमके के बीच ही माना जाता रहा है।
एआईएडीएमके से अलग होने के बाद पन्नीरसेल्वम ने ‘एआईएडीएमके कार्यकर्ता अधिकार पुनर्प्राप्ति समिति’ बनाकर पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का प्रयास किया था। हालांकि उस समय पार्टी नेतृत्व ने उन्हें दोबारा शामिल करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई थी, जिसमें एक गुट एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में और दूसरा पन्नीरसेल्वम के साथ जुड़ा रहा।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार डीएमके में शामिल होने के लिए पन्नीरसेल्वम और पार्टी नेतृत्व के बीच कई महीनों से बातचीत चल रही थी। पिछले वर्ष जुलाई 2025 में उन्होंने मुख्यमंत्री स्टालिन से मुलाकात भी की थी, जिसे उस समय केवल औपचारिक भेंट बताया गया था। अब माना जा रहा है कि डीएमके में उन्हें महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है, और उन्हें संयुक्त महासचिव पद मिलने की भी अटकलें हैं।



