चेन्नई, 14 मार्च 2026।
तमिलनाडु में रसोई गैस सिलेंडर की कथित कमी के कारण राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन ने केंद्र सरकार के खिलाफ रविवार 15 मार्च को पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
गठबंधन का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियों और विदेश नीति के कारण घरेलू और व्यावसायिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। बयान में कहा गया कि गैस की कमी का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल, रेस्तरां और छोटे-मझोले उद्योगों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। यदि समस्या जल्द हल नहीं हुई, तो कई छोटे व्यवसायों के बंद होने का खतरा है और हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
गठबंधन ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पहले ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर चुके हैं। बावजूद इसके केंद्र की ओर से अब तक न तो स्पष्ट कदम उठाए गए और न ही संसद में इस विषय पर चर्चा की पहल की गई।
द्रमुक नेतृत्व वाले गठबंधन ने केंद्र सरकार पर तमिलनाडु के साथ भेदभाव करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने शिक्षा फंड में देरी, मनरेगा राशि की विलंबित भुगतान, पेयजल पाइपलाइन परियोजनाओं में धन का अभाव, मदुरै और कोयंबटूर मेट्रो रेल परियोजनाओं में अड़चनें, होसुर हवाईअड्डा परियोजना में देरी और तीन-भाषा नीति के तहत तमिल भाषा की अनदेखी जैसे मुद्दों का जिक्र किया।
घोषणा के अनुसार, 15 मार्च को सुबह 10:30 बजे तमिलनाडु के सभी जिलों में यूनियन, नगर, क्षेत्र और पंचायत स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इन प्रदर्शनों में द्रमुक और सहयोगी दलों के सांसद, विधायक, जिला और यूनियन स्तर के पदाधिकारी, शाखा सचिव, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम लोग शामिल होंगे।
गठबंधन ने अपने जिला सचिवों को निर्देश दिया है कि वे प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, ताकि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता का विरोध मजबूती से दर्ज कराया जा सके।



