संपादकीय
24 Feb, 2026

बच्चों को मोबाइल के बजाय कंप्यूटर देना ज्यादा बेहतर

डॉ. शैलेश शुक्ला का यह विचारोत्तेजक लेख डिजिटल युग में बच्चों के बौद्धिक विकास, डिजिटल अनुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी कौशल के संदर्भ में कंप्यूटर को अधिक उद्देश्यपूर्ण और संरचित विकल्प बताया गया है।

डॉ. शैलेश शुक्ला
डिजिटल युग में यह प्रश्न लगभग हर अभिभावक और शिक्षक के सामने खड़ा है कि बच्चों को तकनीक से कैसे जोड़ा जाए और किस सीमा तक जोड़ा जाए। आज लगभग हर घर में स्मार्टफोन उपलब्ध है। मोबाइल फोन ने संवाद, मनोरंजन और जानकारी तक पहुंच को अत्यंत सरल बना दिया है। किंतु सुविधा का यही उपकरण बच्चों के हाथों में कब आवश्यकता से अधिक निर्भरता का कारण बन जाता है, इसका अनुमान अक्सर देर से होता है। ऐसे समय में यह विचार गंभीरता से उभरता है कि क्या बच्चों को मोबाइल के बजाय कंप्यूटर देना अधिक संतुलित और उपयोगी विकल्प हो सकता है। यह केवल उपकरण का चयन नहीं, बल्कि बच्चों के बौद्धिक विकास, एकाग्रता, सीखने की आदतों और डिजिटल अनुशासन से जुड़ा प्रश्न है।
मोबाइल फोन की सबसे बड़ी विशेषता उसकी पोर्टेबिलिटी है। वह हर समय हाथ में रहता है, जेब में समा जाता है और तुरंत ध्यान आकर्षित करता है। यही उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी है। मोबाइल का डिजाइन त्वरित प्रतिक्रिया और त्वरित संतुष्टि पर आधारित है। छोटी स्क्रीन, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, रंगीन ऐप्स और सोशल मीडिया की निरंतर गतिविधि बच्चों का ध्यान बार-बार भटकाती है। पढ़ाई के नाम पर शुरू किया गया स्क्रीन टाइम कई बार मनोरंजन या अनियंत्रित ब्राउज़िंग में बदल जाता है। इसके विपरीत कंप्यूटर अपेक्षाकृत स्थिर और उद्देश्यपूर्ण उपकरण है। वह मेज पर रखा जाता है, बैठकर उपयोग किया जाता है और सामान्यतः किसी विशेष कार्य के लिए खोला जाता है। यह संरचना बच्चों के उपयोग व्यवहार को अधिक अनुशासित बनाती है।
कंप्यूटर का उपयोग प्रायः संरचित गतिविधियों से जुड़ा होता है—जैसे टाइपिंग, प्रोजेक्ट तैयार करना, प्रस्तुति बनाना, कोडिंग सीखना, शोध करना या डेटा व्यवस्थित करना। इन कार्यों में योजना, धैर्य और क्रमबद्ध सोच की आवश्यकता होती है। बड़ी स्क्रीन पर काम करना आंखों और मस्तिष्क दोनों के लिए अपेक्षाकृत सुविधाजनक होता है। बच्चा सामग्री को विस्तार से पढ़ सकता है, विभिन्न स्रोतों की तुलना कर सकता है और जानकारी को व्यवस्थित ढंग से संजो सकता है। इसके विपरीत मोबाइल की छोटी स्क्रीन गहन अध्ययन के लिए सीमित मानी जाती है। लंबे लेख पढ़ना, जटिल ग्राफ समझना या विस्तृत असाइनमेंट तैयार करना मोबाइल पर कठिन हो सकता है।
मोबाइल का उपयोग अक्सर निजी और व्यक्तिगत अनुभव बन जाता है। बच्चा अपने कमरे में या किसी कोने में बैठकर फोन चला सकता है। इससे अभिभावकीय निगरानी सीमित हो जाती है। कंप्यूटर, विशेषकर डेस्कटॉप या पारिवारिक लैपटॉप, सामान्यतः साझा स्थान पर रखा जाता है। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और माता-पिता यह देख सकते हैं कि बच्चा किस प्रकार की सामग्री देख रहा है। यह व्यवस्था डिजिटल सुरक्षा और अनुशासन दोनों के लिए सहायक होती है।
मानसिक विकास के दृष्टिकोण से भी यह अंतर महत्वपूर्ण है। मोबाइल ऐप्स का डिजाइन तेज और छोटे कंटेंट पर आधारित होता है। छोटे वीडियो, त्वरित गेम स्तर और लगातार स्क्रॉलिंग की आदत बच्चों में अधीरता और त्वरित संतुष्टि की प्रवृत्ति बढ़ा सकती है। इसके विपरीत कंप्यूटर पर किए जाने वाले कार्य प्रायः दीर्घकालिक होते हैं—जैसे लेखन, प्रोग्रामिंग, ग्राफिक डिजाइन या शोध। ये गतिविधियां समस्या-समाधान क्षमता, रचनात्मकता और धैर्य विकसित करती हैं। कंप्यूटर बच्चों को केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि सृजनकर्ता बनने की दिशा में प्रेरित कर सकता है।
शैक्षिक दृष्टि से कंप्यूटर का महत्व और भी स्पष्ट हो जाता है। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में अधिकांश असाइनमेंट, प्रस्तुति और ऑनलाइन पाठ्यक्रम कंप्यूटर-अनुकूल होते हैं। कीबोर्ड पर टाइपिंग कौशल विकसित करना, फाइल प्रबंधन सीखना और बुनियादी सॉफ्टवेयर का उपयोग करना भविष्य की शिक्षा और रोजगार के लिए आवश्यक कौशल हैं। यदि बच्चे प्रारंभ से कंप्यूटर के माध्यम से काम करना सीखते हैं, तो वे तकनीक को गहराई से समझते हैं। मोबाइल पर केवल ऐप्स का उपयोग करना डिजिटल साक्षरता का सीमित रूप है, जबकि कंप्यूटर के माध्यम से तकनीक की संरचना, कार्यप्रणाली और उपयोग की व्यापक समझ विकसित होती है।
यह कहना उचित नहीं होगा कि मोबाइल पूरी तरह हानिकारक है। मोबाइल भी उपयोगी शैक्षिक ऐप्स, भाषा सीखने के साधन और संवाद की सुविधा प्रदान करता है। समस्या उपकरण में नहीं, बल्कि उसके उपयोग की प्रकृति और अवधि में है। किंतु बच्चों की आयु और विकास स्तर को देखते हुए मोबाइल का अनियंत्रित उपयोग जोखिमपूर्ण हो सकता है। छोटे बच्चे मनोरंजन की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। यदि उन्हें अध्ययन के नाम पर मोबाइल दिया जाता है, तो वह शीघ्र ही खेल या वीडियो देखने का माध्यम बन सकता है। कंप्यूटर अपनी संरचना और सीमित पोर्टेबिलिटी के कारण अपेक्षाकृत नियंत्रित उपयोग की संभावना देता है।
स्वास्थ्य के संदर्भ में भी यह अंतर विचारणीय है। मोबाइल को अक्सर आंखों के अत्यधिक निकट रखा जाता है, जिससे दृष्टि पर दबाव पड़ सकता है। लंबे समय तक झुककर देखने से गर्दन और पीठ पर भी प्रभाव पड़ता है। कंप्यूटर का उपयोग यदि सही मुद्रा में किया जाए तो शरीर पर अपेक्षाकृत कम दबाव पड़ता है। बड़ी स्क्रीन पर देखने से आंखों को कम तनाव हो सकता है, बशर्ते स्क्रीन समय संतुलित रखा जाए।
डिजिटल अनुशासन आज की बड़ी चुनौती है। यदि बच्चे हर समय मोबाइल से जुड़े रहते हैं, तो ऑफलाइन गतिविधियों—जैसे खेल, पुस्तक-पठन, पारिवारिक संवाद और रचनात्मक कार्य—के लिए समय कम हो सकता है। कंप्यूटर का उपयोग सामान्यतः निर्धारित समय और उद्देश्य से जुड़ा होता है। इससे डिजिटल और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन बनाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। यदि अभिभावक स्पष्ट समय-सारिणी बनाकर कंप्यूटर उपयोग की अनुमति दें, तो बच्चे संतुलित डिजिटल आदतें विकसित कर सकते हैं।
यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि केवल कंप्यूटर देना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को डिजिटल नैतिकता, ऑनलाइन सुरक्षा और जिम्मेदार व्यवहार के बारे में भी शिक्षित करना जरूरी है। इंटरनेट अवसरों के साथ जोखिम भी लाता है। इसलिए परिवार और विद्यालय दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। तकनीक को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय उसके विवेकपूर्ण उपयोग की शिक्षा देना अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण है।
अंततः बच्चों को मोबाइल के बजाय कंप्यूटर देना केवल तकनीकी निर्णय नहीं, बल्कि शैक्षिक और विकासात्मक दृष्टि से एक रणनीतिक विकल्प हो सकता है। कंप्यूटर बच्चों को गहराई से सीखने, सृजन करने और तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर देता है। वह उन्हें निष्क्रिय उपभोक्ता नहीं, बल्कि सक्रिय निर्माता बनने की दिशा में प्रेरित कर सकता है। डिजिटल युग में बच्चों को तकनीक से दूर करना संभव नहीं है, किंतु उन्हें ऐसी तकनीक देना आवश्यक है जो उनके बौद्धिक, रचनात्मक और नैतिक विकास में सहायक हो। यदि संतुलित विकल्प चुनना हो, तो मोबाइल की तुलना में कंप्यूटर अधिक उद्देश्यपूर्ण, संरचित और शिक्षण-केंद्रित माध्यम सिद्ध हो सकता है। यही दृष्टिकोण बच्चों को सशक्त और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
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आज का राशिफल

पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। किसी से कहा सुनी न हो यही ध्यान रहे। अपना कार्य दूसरों के सहयोग से बना लेंगे। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। शुभांक-1-4-6

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