लखनऊ, 10 मार्च।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया। इसके साथ ही जेवर स्थित एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया। लाइसेंस मिलने के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन और वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सुरक्षा कार्यक्रम वर्तमान में ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी की समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय की जाएगी।
गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इसे विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का मिश्रण देखने को मिलेगा। मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं।
एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन तैयार किया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में यह क्षमता बढ़ाकर तीन करोड़, जबकि तीसरे और चौथे चरण में सात करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
टर्मिनल भवन में 48 चेक-इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर हैं। यात्रियों के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज तैयार किए जा रहे हैं। एयरपोर्ट में 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों की क्षमता है। प्रारंभिक चरण में कार्गो हब की क्षमता 2.5 लाख टन प्रतिवर्ष होगी, जिसे बाद में 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा।
तकनीकी दृष्टि से एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। डिजीयात्रा आधारित बॉयोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम लागू किए जा रहे हैं। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए यह एयरपोर्ट नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि नोएडा एयरपोर्ट के संचालन से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।



