श्रीनगर, 20 फरवरी।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुक्रवार को बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) हिमालयी राज्यों में हाइपर-स्थानीय मौसम पूर्वानुमान प्रणाली शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके लिए सात जिलों की पहचान की गई है, जिनमें विशेष रूप से बादल फटने और अचानक भारी बारिश की शुरुआती चेतावनी पर ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में नेशनल कांफ्रेंस के विधायक सज्जाद शाहीन के प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि जम्मू-कश्मीर में चार अतिरिक्त डॉपलर रडार, 34 स्वचालित मौसम स्टेशन और स्नो गेज स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में श्रीनगर, जम्मू और बनिहाल में तीन एक्स-बैंड रडार हैं।
उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्रों में पिछले 15 वर्षों के बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन का डेटा का इस्तेमाल संवेदनशीलता आकलन के लिए किया गया। जम्मू संभाग में किश्तवाड़, डोडा, रामबन, रियासी और उधमपुर उच्च-संवेदनशील, जबकि राजौरी, पुंछ और कठुआ मध्यम संवेदनशील श्रेणी में हैं। कश्मीर संभाग में अनंतनाग, कुलगाम और गांदरबल अत्यधिक संवेदनशील हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए रडार डोडा, राजौरी, अनंतनाग और बारामूला में लगाए जाएंगे। इसके अलावा किश्तवाड़, डोडा, रामबन, राजौरी, उधमपुर, कुपवाड़ा, बांदीपोरा, बारामूला और शोपियां में 26 अतिरिक्त स्वचालित मौसम स्टेशन और आठ स्नो गेज स्थापित किए जाएंगे।
अब्दुल्ला ने बताया कि विस्तारित अवलोकन नेटवर्क जल-मौसम संबंधी घटनाओं के पूर्वानुमान और आपदा तैयारियों को मजबूत करेगा। लोक निर्माण विभाग ने ढलान स्थिरीकरण, रिटेनिंग दीवार, गेबियन संरचना और जैव-इंजीनियरिंग तकनीक जैसे दीर्घकालिक उपाय शुरू किए हैं।
उन्होंने कहा कि बहु-खतरा जोखिम मूल्यांकन और खतरा, भेद्यता एवं जोखिम आकलन (एचवीआरए) के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। यह समिति बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर लक्षित हस्तक्षेप सुनिश्चित करेगी।



