श्रीनगर, 02 फ़रवरी।
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने गुरुवार को मेवाड़ विश्वविद्यालय, चित्तौड़गढ़, राजस्थान में 33 कश्मीरी छात्रों के निलंबन पर चिंता व्यक्त की। इन छात्रों ने अपने बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम के लिए राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (आरएनसी) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) से अनिवार्य अनुमोदन प्राप्त करने में विश्वविद्यालय की विफलता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।
एसोसिएशन ने जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि 50 से अधिक छात्रों का शैक्षणिक भविष्य गंभीर खतरे में है।
एक बयान में कहा गया कि राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहमी ने बताया कि वैधानिक मंजूरी न मिलने के कारण 50 से अधिक कश्मीरी छात्रों के शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। आरएनसी और आईएनसी अनुमोदन के बिना उनकी डिग्री की वैधता, पेशेवर पंजीकरण और भविष्य में रोजगार के अवसर अनिश्चित हैं।
खुएहमी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने छात्रों को बार-बार आश्वासन दिया था कि आवश्यक मंजूरी प्राप्त कर ली जाएगी। पिछले साल रजिस्ट्रार ने लिखित प्रतिबद्धता भी जारी की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
लंबी अनिश्चितता और विकल्प न होने के कारण छात्रों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन ने उनकी चिंताओं को अनदेखा करते हुए 33 छात्रों को निलंबित कर दिया। खुएहमी ने कहा कि यह दंडात्मक कार्रवाई असहमति को दबाने के उद्देश्य से लगती है, जबकि वास्तविक समस्या विश्वविद्यालय की प्रशासनिक लापरवाही की है।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों को या तो मान्यता प्राप्त कॉलेज में स्थानांतरित किया जाए या तुरंत बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम के लिए आवश्यक अनुमोदन दिया जाए, ताकि उनके भविष्य और शिक्षा पर कोई खतरा न हो।


