काठमांडू, 12 मार्च 2026।
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबूराम भट्टराई ने भारत और चीन के बीच नेपाल को पुल का काम करने के लिए तैयार रहने की बात कही है और नेपाली युवाओं की क्षमताओं पर गर्व व्यक्त किया है।
भट्टराई ने नई दिल्ली में आयोजित NXT कॉन्क्लेव के प्रधानमंत्री स्तरीय राउंड टेबल सत्र में नेपाल की भू-राजनीतिक स्थिति और युवा नेतृत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अब नेपाल को केवल दो महाशक्तियों के बीच दबाव में फंसे देश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे दो बड़ी शक्तियों के बीच एक गतिशील सेतु की भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए कहा कि छोटे देशों के लिए अपनी रणनीति बदलना आवश्यक हो गया है। प्रौद्योगिकी के विकास ने "वसुधैव कुटुम्बकम्" के सिद्धांत को व्यवहार में लाना आसान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल को भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और विकास से पर्याप्त लाभ उठाने में सक्षम होना चाहिए।
डॉ. भट्टराई ने दक्षिण एशिया में गरीबी और अस्थिरता का मुख्य कारण संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि कमजोर संस्थागत संरचना और शासन की विफलता बताया। उन्होंने देशों को आपस में घनिष्ठ सहयोग बढ़ाने और वैश्विक साझेदारी के अवसरों का लाभ उठाने की सलाह दी।
उनके अनुसार बदलते वैश्विक परिदृश्य में नेपाल जैसे देशों के लिए परिस्थितियों के अनुसार रणनीतिक ढाल बनाना ही समझदारी होगी। इस सत्र में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री फ्रेडरिक रेनफेल्ड भी मौजूद रहे।



