काठमांडू, 13 मार्च।
नेपाल में पिछले वर्ष ८-९ सितंबर को हुए जेन–जी आंदोलन के दौरान संसद भवन, सर्वोच्च अदालत, सिंहदरबार और राष्ट्रपति भवन में आगजनी में पेट्रोलियम पदार्थ के इस्तेमाल की पुष्टि फोरेंसिक जांच से हुई है। इन प्रदर्शनों में संसद भवन के बाहर 17 सहित कुल 19 लोगों की मौत हुई थी। इसके विरोध में ९ सितंबर को देशभर में हिंसात्मक प्रदर्शन हुए थे।
फोरेंसिक जांच के लिए आगजनी वाले स्थानों से राख, जली मिट्टी, जले हुए तार, आधे जले लकड़ी और कपड़ों के १५ नमूने अलग-अलग जिप-लॉक प्लास्टिक में पैक किए गए थे। इसके साथ ही १२ मिलीलीटर पीले रंग का तरल पदार्थ सेंट्रीफ्यूज ट्यूब में रखकर भारत के दिल्ली भेजा गया। सभी नमूनों को सीलबंद कार्टन में रखकर बाहर से कपड़े लपेटकर टेप से सील किया गया।
जले हुए भवनों से एकत्र किए गए इन १५ नमूनों की जांच भारत के गृह मंत्रालय के अधीन सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में की गई। जांच में पेट्रोलियम उत्पादों (हाइड्रोकार्बन) के अवशेष पाए गए। जांच भौतिक-रासायनिक विधि, रासायनिक परीक्षण, थिन लेयर क्रोमैटोग्राफी और गैस क्रोमैटोग्राफी–मास स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री तकनीक से की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि आग लगी जगह से लिए गए नमूनों में हाइड्रोकार्बन पाए जाने का मतलब है कि पेट्रोलियम पदार्थ का इस्तेमाल हुआ था। अमेरिका की व्योमिंग विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले काठमांडू इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड साइंसेस के वरिष्ठ वैज्ञानिक वसंत गिरी ने बताया कि हाइड्रोकार्बन पेट्रोलियम पदार्थ में ही पाया जाता है। फोरेंसिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि भेजा गया तरल नमूना पेट्रोल था। हालांकि सिंहदरबार परिसर के भीतर स्थित एक मंत्रालय से लिए गए नमूने की जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी।



