शिमला, 19 फ़रवरी।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश में कांग्रेस की सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र को कोसने की बजाय सरकार को अपने वित्तीय प्रबंधन को सुधारना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है, जबकि असली आवश्यकता प्रभावी वित्तीय प्रबंधन की है।
गुरूवार को प्रेस वार्ता में जयराम ठाकुर ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को लेकर हो रही राजनीति को गलत बताया। उन्होंने कहा कि जब यह ग्रांट हिमाचल को मिल रही थी, तब भी सरकार वित्तीय संकट का हवाला दे रही थी। 16वें वित्त आयोग के बाद यह ग्रांट बंद होने पर मौजूदा सरकार की जिम्मेदारी है कि वह राज्य का आर्थिक प्रबंधन करे।
उन्होंने कहा कि अपनी नाकामियों का दोष केंद्र या पिछली सरकारों पर डालना समाधान नहीं है। मुख्यमंत्री के बयानों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बताया कि कई मौकों पर कर्ज लेने और चुकाने के आंकड़े विरोधाभासी तरीके से पेश किए गए। विपक्ष ने तथ्यों को सुधारने का मौका मांगा, लेकिन अनुमति नहीं मिली, जिसके विरोध में भाजपा विधायकों ने सदन में विरोध दर्ज कराया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा प्रदेश हितों के साथ खड़ी है और आगे भी जनता के मुद्दे उठाती रहेगी। उन्होंने जोर दिया कि राजनीतिक बयानबाजी की बजाय ठोस समाधान पर ध्यान देना चाहिए। वित्त आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि यूपीए सरकार के दौरान हिमाचल को 18 हजार करोड़ रुपये मिले, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में 89,254 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिला।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बजट में पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं, तो भारी कर्ज अदायगी के दावे कैसे किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि कर्ज लेना असामान्य नहीं है, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना गंभीर विषय है।



