नई दिल्ली, 14 फ़रवरी।
केंद्र सरकार ने रेलवे की 18,509 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को शनिवार को मंजूरी दे दी। इन परियोजनाओं में कासारा–मनमाड तीसरी और चौथी लाइन, दिल्ली–अंबाला तीसरी और चौथी लाइन तथा बल्लारी–होसपेटे तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने रेल मंत्रालय की इन तीन परियोजनाओं को हरी झंडी दी। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं से रेलवे की लाइन क्षमता बढ़ेगी, परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा और दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक के 12 जिलों को कवर करते हुए भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 389 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इन परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और निर्माण कार्य के दौरान लगभग 265 लाख मानव-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।
वैष्णव ने बताया कि ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और एकीकृत योजना को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। इससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी और लगभग 3,902 गांवों (करीब 97 लाख आबादी) को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। इन परियोजनाओं से भवली बांध, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, माता वैष्णो देवी कटरा/श्रीनगर तथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हम्पी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा।
मंत्री ने कहा कि ये मार्ग कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, चूना पत्थर/बॉक्साइट, कंटेनर, खाद्यान्न, चीनी, उर्वरक और पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं। क्षमता विस्तार से 96 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं से लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी, लगभग 22 करोड़ लीटर तेल आयात में बचत होगी और 111 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग चार करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।


