हरियाणा में आरएसएस की शताब्दी वर्ष प्रतिनिधि सभा में संगठनात्मक ढांचे, डिजिटल विस्तार, घर-घर अभियान और सामाजिक सेवा पर चर्चा कर भविष्य की रणनीति तय की गई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन के भीतर व्यापक समीक्षा और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए महत्वपूर्ण बैठक हरियाणा में आयोजित की जा रही है। यह बैठक संघ की सर्वोच्च निर्णायक इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की है, जिसमें देशभर से हजारों प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में संघ और उसकी विचारधारा से जुड़े करीब 32 संगठनों के लगभग 1487 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी यहां तीन दिनों तक उपस्थित रहकर कार्यवाही के साक्षी बन रहे हैं। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी इस बैठक में मौजूद हैं। माना जा रहा है कि संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठनात्मक ढांचे और कार्यशैली में कुछ बड़े बदलावों की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी और अब संगठन अपने 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इस शताब्दी वर्ष को संघ विशेष महत्व दे रहा है। संगठन का लक्ष्य केवल अपने इतिहास का उत्सव मनाना नहीं बल्कि भविष्य की दिशा तय करना भी है। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार इस बैठक में शताब्दी वर्ष के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही संघ के विभिन्न प्रकल्पों में आई चुनौतियों, संगठन के विस्तार और आने वाले समय की कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी। बैठक में पारित प्रस्तावों और निर्णयों की आधिकारिक जानकारी भी प्रतिनिधियों को दी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार संघ अपने संगठनात्मक ढांचे में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों पर विचार कर रहा है। इनमें सबसे प्रमुख प्रस्ताव संगठन की संरचना को अधिक विकेंद्रीकृत बनाना है। संघ में वर्तमान में विभिन्न स्तरों पर प्रचारकों और पदाधिकारियों की व्यवस्था है, लेकिन अब संगठन इस ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा सकता है। संभावित योजना के तहत क्षेत्र प्रचारकों की संख्या कम की जा सकती है और जिला, तहसील, ब्लॉक तथा गांव स्तर के कार्यकर्ताओं को अधिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि संघ की ताकत और निर्णय प्रक्रिया निचले स्तर तक पहुंचे। इससे संगठन के स्थानीय कार्यकर्ताओं की भूमिका मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
संघ के विस्तार को लेकर भी इस बैठक में विशेष चर्चा हो रही है। हाल के वर्षों में देशभर में संघ की शाखाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय में देशभर में 5500 से अधिक नई शाखाएं शुरू की गई हैं। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों के जरिए भी संघ से जुड़ने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अनुमान है कि हर साल लगभग 1 करोड़ 25 लाख लोग विभिन्न माध्यमों से संघ की विचारधारा से जुड़ रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन पंजीकरण और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति भी संगठन की विस्तार योजना का हिस्सा बन चुकी है।
संघ ने अपने शताब्दी वर्ष के दौरान एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। संगठन का प्रयास है कि देशभर के 10 करोड़ से अधिक घरों तक संघ की पहुंच सुनिश्चित की जाए। इस लक्ष्य के तहत विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और सेवा कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों तक पहुंचने की योजना बनाई गई है। संघ से जुड़े स्वयंसेवक घर-घर संपर्क अभियान चलाकर समाज के विभिन्न वर्गों को संगठन की गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास करेंगे। यह अभियान केवल संगठनात्मक विस्तार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कार्यों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भी लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
आने वाले वर्षों में कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अगले दो वर्षों में नौ राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव प्रस्तावित हैं। इसी वर्ष पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा 2027 में उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे बड़े राज्यों में चुनाव होंगे। इन चुनावों को अगले लोकसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इसलिए संघ संगठनात्मक स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट और मजबूत संरचना पर विशेष जोर दे रहा है। संघ की रणनीति यह है कि समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाकर वैचारिक आधार को मजबूत किया जाए और संगठनात्मक नेटवर्क को गांव स्तर तक सक्रिय किया जाए।
हरियाणा में आयोजित यह बैठक केवल एक नियमित संगठनात्मक बैठक नहीं है, बल्कि इसे संघ के भविष्य की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ अपने पिछले अनुभवों की समीक्षा करते हुए नए युग की चुनौतियों के अनुरूप रणनीति बनाने की कोशिश कर रहा है। संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलाव, डिजिटल विस्तार, सामाजिक पहुंच और आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में तैयार की जा रही योजनाएं संघ के अगले चरण की दिशा तय कर सकती हैं। इस बैठक में लिए गए निर्णय आने वाले वर्षों में संघ की कार्यशैली और उसकी सामाजिक भूमिका को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए देशभर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर इस प्रतिनिधि सभा की कार्यवाही पर टिकी हुई है।