भुवनेश्वर, 12 मार्च 2026।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान कथित असम्मानजनक व्यवहार पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। राष्ट्रपति मुर्मु हाल ही में सिलिगुडी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में भाग लेने गई थीं।
माझी ने पत्र में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा आपसी सम्मान और गरिमा पर आधारित है और राजनीतिक मतभेद कभी भी संवैधानिक पदों के सम्मान को प्रभावित नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में अंतिम समय में बदलाव, खासकर आदिवासी कार्यक्रम का स्थान परिवर्तन, दुर्भाग्यपूर्ण और संविधान के अनुरूप नहीं हैं।
ओडिशा के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले हुई, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ गई, क्योंकि राष्ट्रपति मुर्मु स्वयं संथाल समुदाय से आने वाली सम्मानित आदिवासी महिला हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से देशभर में आदिवासी, पिछड़े और दलित समुदायों की भावनाएं आहत हुई हैं।
माझी ने पत्र में लिखा कि संथाल समुदाय का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और व्यक्तिगत रूप से उन्हें इस घटना से पीड़ा हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए जाना जाता है, इसलिए ऐसे मामलों में उच्च मानकों का पालन होना चाहिए।
माझी ने ममता बनर्जी से अनुरोध किया कि वे इस मामले पर विचार करें और राष्ट्रपति तथा देश की जनता से खेद व्यक्त करें। उनके अनुसार, ऐसा कदम लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक पदों की गरिमा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।



