छत्तीसगढ़
14 Mar, 2026

नवागढ़ की प्राचीन धरोहरों के संरक्षण में राज्य सरकार सक्रिय, विशेषज्ञ दल करेगा स्थल निरीक्षण

कोंडागांव के नवागढ़ क्षेत्र में प्राचीन धरोहरों का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने विशेषज्ञ दल को स्थल निरीक्षण और सर्वेक्षण का निर्देश दिया।

रायपुर, 14 मार्च।

संस्कृति एवं पुरातत्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने कोंडागांव जिले के नवागढ़ क्षेत्र में पाए गए प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों के संबंध में त्वरित संज्ञान लिया है। मंत्री ने पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय को निर्देशित किया कि नवागढ़ क्षेत्र में उपलब्ध प्राचीन प्रतिमाओं और अन्य अवशेषों का विशेषज्ञ दल द्वारा शीघ्र स्थल निरीक्षण और विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाए।

मंत्री अग्रवाल ने कहा कि नवागढ़ क्षेत्र में 5वीं-6वीं शताब्दी ईस्वी से संबंधित प्राचीन प्रतिमाओं और अवशेषों की जानकारी सामने आने के बाद इसका वैज्ञानिक अध्ययन अत्यंत आवश्यक हो गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि विशेषज्ञ दल सभी प्रतिमाओं, स्थापत्य अवशेषों, शिल्प कलाकृतियों और संभावित पुरातात्विक स्थलों का सूक्ष्म अध्ययन और विस्तृत दस्तावेजीकरण करे, ताकि इन धरोहरों के ऐतिहासिक महत्व का समुचित आकलन हो सके।

उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण और स्थल निरीक्षण से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर आवश्यकतानुसार इन पुरातात्विक अवशेषों के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा के कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। यदि स्थल का ऐतिहासिक महत्व प्रमाणित होता है, तो इसे संरक्षित पुरातात्विक स्थल के रूप में विकसित करने की पहल की जाएगी।

मंत्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन सभ्यताओं, स्थापत्य कला और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से परिपूर्ण रही है। प्रदेश के अनेक अंचलों में ऐसे महत्वपूर्ण स्थल हैं, जिनका व्यवस्थित अध्ययन और संरक्षण आवश्यक है। राज्य सरकार लगातार इन धरोहरों की पहचान, संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन के प्रयास कर रही है।

उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और आम नागरिकों की सहभागिता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि इन धरोहरों का संरक्षण केवल अतीत को सुरक्षित रखने का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सांस्कृतिक जड़ों और इतिहास से जोड़ने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐतिहासिक स्थलों और पुरातात्विक धरोहरों को संरक्षण के साथ-साथ अध्ययन, शोध और सांस्कृतिक पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित किया जाए, जिससे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान मिले और स्थानीय स्तर पर पर्यटन एवं रोजगार के नए अवसर भी सृजित हों।

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