विदिशा, 02 मार्च 2026
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज नगर में सदियों पुरानी अनूठी परंपरा के तहत होलिका दहन इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ किया जाएगा। यहां की बड़ी होली को बंदूक से गोली चलाकर प्रज्वलित करने की परंपरा आज भी कायम है। इस प्रक्रिया में पहले सूखी घास, लकड़ी और रुई का ढेर लगाया जाता है, जिसके बाद बंदूक से फायर कर चिंगारी उत्पन्न की जाती है और उसी अग्नि से नगर के अन्य स्थानों पर स्थापित होलिकाओं को जलाया जाता है। नगर में इस बार 33 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक शामिल होंगे।
नगर में होलिका दहन के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया जाएगा और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी। यह परंपरा सिरोंज की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है और हर वर्ष लोग इसे देखने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं।
धर्माचार्यों के अनुसार इस परंपरा का संबंध होल्कर शासनकाल से माना जाता है। उस समय इस बड़ी होली को रावजी की होली कहा जाता था। होल्कर राज्य काल में भी इसी प्रकार सूखी घास और रुई का ढेर लगाकर बंदूक से फायर कर आग उत्पन्न की जाती थी और उसी से होलिका दहन किया जाता था। बाद में इस परंपरा को कानूनगो परिवार ने आगे बढ़ाया और आज भी सिरोंज के कानूनगो माथुर परिवार द्वारा इसका निर्वहन किया जा रहा है। परिवार के सदस्य हर वर्ष विधि-विधान से इस आयोजन को संपन्न कराते हैं।
परिवार के वंशज महेश माथुर ने बताया कि इतिहास में एक समय इस परंपरा को रोकने का प्रयास भी किया गया था, लेकिन पूर्वजों ने इसे जीवित रखा। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वजों ने परंपरा के अनुसार चबूतरे पर घास का ढेर लगाकर बंदूक से फायर कर होली जलाई थी, जिसके बाद यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी जारी रही। नगरवासियों के लिए यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि उनकी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है।
होली के इस विशेष आयोजन को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी लोग सिरोंज पहुंचते हैं। बड़ी होली जलने के बाद नगर के अन्य मोहल्लों और चौराहों पर भी उसी अग्नि से होलिका दहन किया जाता है। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।



