टॉप न्यूज़
09 Mar, 2026

ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में खामेनेई के बेटे मोजतबा को आगे बढ़ाने का बड़ा दांव

विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts) द्वारा मोजतबा को उनके उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त करने से तेहरान में कट्टरपंथियों का नियंत्रण और मजबूत हो गया है—यह ऐसा दांव है जो अमेरिका और इज़राइल के साथ ईरान के युद्ध की दिशा बदल सकता है और जिसका असर मध्य पूर्व से कहीं आगे तक पड़ सकता है।

ईरान के धार्मिक नेतृत्व ने समझौते के बजाय टकराव का रास्ता चुना है और मोजतबा खामेनेई को उनके पिता अली खामेनेई का उत्तराधिकारी नियुक्त किया है। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधा संदेश है, जिन्होंने पहले ही मोजतबा को “अस्वीकार्य” बताया था।

संघर्ष के शुरुआती दिनों में ही अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। यह युद्ध अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है।

विशेषज्ञों की परिषद (Assembly of Experts) द्वारा मोजतबा को नया सर्वोच्च नेता बनाए जाने से तेहरान में कट्टरपंथियों का नियंत्रण और मजबूत हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला ईरान के अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी संघर्ष की दिशा बदल सकता है और इसका असर मध्य-पूर्व से बाहर तक पड़ सकता है।

मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ शोधकर्ता एलेक्स वटांका ने कहा, “मोजतबा का सत्ता संभालना उसी रणनीति की तरह है। अमेरिका के लिए यह बड़ी शर्मिंदगी है कि उसने इतना बड़ा सैन्य अभियान चलाया, इतना जोखिम उठाया, और अंत में केवल 86 वर्षीय नेता को मार पाया—जिसकी जगह अब उसका और भी कट्टरपंथी बेटा ले रहा है।”

ईरान की जटिल धर्मतांत्रिक व्यवस्था में सर्वोच्च नेता ही सर्वोच्च अधिकार होता है। वह विदेश नीति, परमाणु कार्यक्रम और सैन्य निर्णयों पर अंतिम नियंत्रण रखता है तथा निर्वाचित राष्ट्रपति और संसद का मार्गदर्शन भी करता है।

टकराव की ओर बढ़ता ईरान

विश्लेषकों का कहना है कि मोजतबा जैसे कट्टरपंथी नेता का चयन यह स्पष्ट संकेत देता है कि ईरान की नेतृत्व व्यवस्था किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहती। बल्कि वह टकराव, बदला और लंबे संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ने को तैयार है।

सूत्रों के मुताबिक मोजतबा को देश के भीतर असंतुष्ट जनता और बाहर बढ़ते युद्ध दोनों से भारी दबाव का सामना करना पड़ेगा, लेकिन उनसे उम्मीद है कि वे तेजी से सत्ता को मजबूत करने के कदम उठाएंगे।

इसका मतलब हो सकता है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की शक्ति और बढ़े, देश में कड़े नियंत्रण लागू हों और विरोध को दबाने के लिए कठोर कार्रवाई की जाए।

तेहरान के करीबी एक क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा, “दुनिया उनके पिता के दौर को याद करेगी। मोजतबा को लोहे की मुट्ठी से शासन करना पड़ेगा… भले ही युद्ध खत्म हो जाए, देश के भीतर कठोर दमन देखने को मिलेगा।”

आर्थिक संकट और बढ़ती अशांति

युद्ध से पहले ही ईरान गंभीर घरेलू संकटों से जूझ रहा था। 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति के बाद से सबसे बड़ी अशांति देखी जा रही थी। देश की अर्थव्यवस्था कमजोर है, महंगाई तेजी से बढ़ रही है, मुद्रा का मूल्य गिर चुका है और गरीबी बढ़ रही है।

इन परिस्थितियों में युद्ध और सख्त शासन से जनता पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।

मुश्किल समय की आशंका

मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ विशेषज्ञ पॉल सलेम का कहना है कि मोजतबा ऐसा नेता नहीं हैं जो अमेरिका के साथ कोई समझौता कर सकें या कूटनीतिक नरमी दिखाएं।

उन्होंने कहा, “इस समय उभरने वाला कोई भी नेता समझौता करने की स्थिति में नहीं है। यह बेहद कठोर समय में लिया गया कठोर फैसला है।”

ईरान के कई धर्मगुरु अमेरिका को “ग्रेट सैटन” यानी “महाशैतान” कहते हैं। उनके अनुसार अली खामेनेई की हत्या ने उन्हें “शहीद” का दर्जा दे दिया है और उनकी तुलना शिया इतिहास के बलिदान के प्रतीक इमाम हुसैन से की जा रही है।

पूर्व अमेरिकी राजनयिक और ईरान विशेषज्ञ एलन आयर ने कहा, “मोजतबा अपने पिता से भी ज्यादा कट्टरपंथी हैं और रिवोल्यूशनरी गार्ड के पसंदीदा उम्मीदवार थे। उनके पास बदला लेने की बड़ी वजहें होंगी।”

सुधारवादियों के विरोधी रहे हैं मोजतबा

56 वर्षीय मोजतबा लंबे समय से उन सुधारवादी समूहों का विरोध करते रहे हैं जो पश्चिमी देशों के साथ संवाद और संबंध सुधारने की वकालत करते हैं।

उनके वरिष्ठ धर्मगुरुओं और IRGC के साथ करीबी संबंध हैं, जो ईरान की सुरक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था दोनों पर बड़ा प्रभाव रखते हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, मोजतबा ने अपने पिता के शासनकाल में सुरक्षा तंत्र और उससे जुड़े विशाल आर्थिक नेटवर्क में काफी प्रभाव हासिल किया था। वे लंबे समय तक अली खामेनेई के “गेटकीपर” रहे और कई मामलों में व्यवहारिक रूप से “छोटे सर्वोच्च नेता” की तरह काम करते थे।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब अमेरिका-इज़राइल का सैन्य अभियान तेज हो रहा है। संयुक्त हमलों में ईरान के ईंधन डिपो और अन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जबकि ईरान की मिसाइलों और ड्रोन ने खाड़ी देशों तक हमले किए हैं, जिससे संघर्ष का दायरा और बढ़ गया है।

कतर और खाड़ी क्षेत्र के एक सूत्र ने कहा, “मोजतबा की नियुक्ति वॉशिंगटन और ट्रंप को यह संदेश देती है कि ईरान पीछे हटने वाला नहीं है—वह अंत तक लड़ाई जारी रखेगा।”

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रास्ता ईरान को लंबे समय तक युद्ध, अंतरराष्ट्रीय अलगाव और अंदरूनी अस्थिरता की ओर ले जा सकता है।

|

दुबई में फंसे कर्नाटक के 50 लोग सुरक्षित बेंगलुरु पहुंचे, विधायक नागेंद्र ने कराई विशेष विमान की व्यवस्था

ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के कारण दुबई में फंसे कर्नाटक के 50 लोग गुरुवार को सुरक्षित बेंगलुरु पहुंच गए। इनमें बल्लारी जिले के 35 और चित्रदुर्ग जिले के 15 लोग शामिल थे। युद्ध के कारण उड़ानों के संचालन में बाधा आने से वे कुछ समय तक दुबई में ही फंसे रहे। बाद में उन्हें शारजाह के रास्ते कोच्चि लाया गया, जहां से बेंगलुरु भेजने के लिए विशेष विमान की व्यवस्था की गई। इस पूरी प्रक्रिया में बल्लारी के विधायक बी. नागेंद्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सभी यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराई। गुरुवार सुबह बेंगलुरु हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद सभी लोगों ने राहत की सांस ली। विधायक नागेंद्र ने उनका स्वागत किया और संकट के समय सहायता के लिए लोगों ने उनका आभार व्यक्त किया। लंबे समय बाद अपने परिवार से मिलकर कई लोग भावुक हो गए, जबकि परिजनों ने भी राहत जताते हुए सरकार और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।

आज का राशिफल

पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। किसी से कहा सुनी न हो यही ध्यान रहे। अपना कार्य दूसरों के सहयोग से बना लेंगे। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। शुभांक-1-4-6

आज का मौसम

भोपाल

16° / 26°

Rainy

ट्रेंडिंग न्यूज़

तुर्किये ने उत्तरी साइप्रस में तैनात किए छह एफ-16 विमान

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के बीच तुर्किये ने उत्तरी साइप्रस में छह एफ-16 लड़ाकू विमान और वायु रक्षा प्रणाली तैनात कर इलाके की सुरक्षा मज़बूत की है।

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता ज्वाला ने जन्म दिए पांच शावक

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबियाई मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म देकर भारत में चीतों की संख्या 53 कर दी।

पश्चिम एशिया संकट से रुपये का दबाव, 92.35 पर पहुंची मुद्रा

पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की तेजी के कारण रुपये डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 92.35 पर पहुंच गया।

कर्तव्य पथ पर ‘शी लीड्स भारत’ शक्ति वॉक, 3000 महिलाएं लेंगी भाग

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के सशक्तिकरण और नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए कर्तव्य पथ पर शक्ति वॉक का आयोजन होगा।

19 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी रामलला के दर्शन, राम मंदिर निर्माण का अधिकांश कार्य पूरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 19 मार्च को राम मंदिर में दर्शन करेंगी और मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं की विशेष योजना बनाई गई है।