28 फरवरी, पूर्वी सिंहभूम।
जुगसलाई नगर परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव इस बार राजनीतिक रणनीति और वोट बंटवारे के कारण खास चर्चा में रहा। झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्ला खान की पत्नी नौशीन खान ने 11,563 वोट प्राप्त कर भाजपा समर्थित उम्मीदवार रिंकू सिंह को 720 वोटों से पराजित किया। तीसरे मोर्चे की उम्मीदवार डॉली मल्लिक को 895 वोट मिले।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव में सीधे मुकाबले की बजाय परदे के पीछे सियासी गणित सक्रिय रहा। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अंतिम समय में डॉली मल्लिक को समर्थन देकर चुनावी समीकरण को त्रिकोणीय बना दिया। आंकड़ों के अनुसार, यदि रिंकू सिंह और डॉली मल्लिक के वोट जोड़ दिए जाते, तो कुल 11,738 वोट होते, जो विजेता से 175 अधिक हैं। इससे स्पष्ट होता है कि विपक्षी वोटों का विभाजन निर्णायक रहा।
धार्मिक और सामुदायिक समर्थन ने भी नतीजों को प्रभावित किया। मुस्लिम बहुल इलाकों में नौशीन खान को मजबूत समर्थन मिला। वहीं, गैर-मुस्लिम वोट एकजुट नहीं हो सके, जिससे भाजपा समर्थित उम्मीदवार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
सिख समुदाय का प्रभाव भी चुनाव में अहम रहा। सिख समाज के नेता सरदार शैलेंद्र सिंह की पत्नी बलबीर कौर ने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन भाजपा नेताओं के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने रिंकू सिंह के समर्थन में अपना चुनाव वापस लिया। बावजूद इसके उनके 548 वोट रिंकू सिंह के खाते में पूरी तरह नहीं गए। यदि डॉली मल्लिक और बलबीर कौर के मत रिंकू सिंह के खाते में जुड़ते, तो उनकी संख्या 12,286 तक पहुंच सकती थी, जो विजेता से 723 अधिक होती।
इस चुनाव ने स्पष्ट कर दिया कि जुगसलाई में राजनीतिक रणनीति और वोट बंटवारा निर्णायक साबित हुआ।



