नई दिल्ली, 19 फ़रवरी।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एआई शिखर सम्मेलन में कहा कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से विकास और नवाचार को जिम्मेदारी पूर्ण और मानव केंद्रित बनाए रखना जरूरी है और आने वाले समय में इस क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में देशों की स्वतंत्रता और रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करनी होगी।
मैक्रों ने भारत के डिजिटल समावेशन की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत ने डिजिटल पहचान, डिजिटल हेल्थ आईडी और पेमेंट सिस्टम जैसे कदम उठाए हैं, जिससे लाखों लेन-देन हो रहे हैं और यह तकनीकी बदलाव एक सभ्यता की कहानी बताता है। उन्होंने कहा कि एआई अब रणनीतिक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है और फ्रांस एवं भारत यूरोप के साथ मिलकर एआई की स्वतंत्रता, मॉडल, बुनियादी ढांचा और संतुलन पर जोर देते हैं।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एआई और डिजिटल दुरुपयोग के खिलाफ सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए और सोशल नेटवर्क पर 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने भारत के इस पहल में शामिल होने की आशा जताई और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भी इस दिशा में सहयोग करेंगे।
मैक्रों ने कहा कि एआई दुनिया को बदल रहा है और इस समय एकजुट होना जरूरी है, अन्यथा पीछे रह जाएंगे। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी देश या कंपनी को किसी अन्य देश को केवल मार्केट और डेटा के रूप में देखने का अधिकार नहीं है। एआई उत्पादकता बढ़ाने और मजदूर बाजार के लिए महत्वपूर्ण है और इसे सबके लिए उपलब्ध और भाषाई रूप से विविध बनाना जरूरी है।
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि तकनीक के युग में बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए प्लेटफॉर्म, सरकार और नियामकों को मिलकर इंटरनेट और सोशल मीडिया को सुरक्षित बनाना होगा। फ्रांस जी-7 अध्यक्षता का उपयोग इस समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए करेगा, जबकि भारत ब्रिक्स अध्यक्षता के माध्यम से इसी दिशा में काम करेगा।
मैक्रों ने कहा कि वर्तमान तनावपूर्ण समय में डिजिटल उपकरणों को समावेशी दृष्टिकोण की ओर निर्देशित करना तात्कालिक जरूरत है और साझा करने, बनाने और ब्रिजिंग पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर एआई को वैश्विक भलाई के लिए उपयोग में लाने का विजन आगे बढ़ाएंगे और नवाचार को जिम्मेदारी तथा मानवता से जोड़ेंगे।



