09 मार्च, नई दिल्ली।
अमेरिका की ओर से भारत को रूसी तेल खरीदने की “अनुमति” दिए जाने वाले बयान पर अभिनेता-राजनेता कमल हासन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और किसी दूसरे देश के आदेश नहीं मानता।
राज्यसभा सांसद और मक्कल नीधि मय्यम के प्रमुख कमल हासन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,
“Dear Mr. President, We, the people of India, belong to a free and sovereign nation. We no longer take orders from distant foreign shores. Please mind your own business to the best of your abilities.”
उन्होंने आगे कहा कि संप्रभु देशों के बीच आपसी सम्मान ही स्थायी वैश्विक शांति की बुनियाद है और भारत अमेरिका तथा उसके नागरिकों की समृद्धि और शांति की कामना करता है।
यह विवाद उस समय सामने आया जब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक साक्षात्कार में कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति पर मध्य-पूर्व के संघर्ष के प्रभाव को देखते हुए वॉशिंगटन ने भारत को अस्थायी तौर पर रूसी तेल खरीदने की “permission” दी है।
Fox Business को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने पहले भारत से रूस से प्रतिबंधित तेल खरीद बंद करने का आग्रह किया था और भारत ने उसका पालन किया। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की कमी को कम करने के लिए फिलहाल भारत को रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दी गई है और भविष्य में कुछ रूसी तेल पर लगे प्रतिबंध भी हटाए जा सकते हैं।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि यदि तेल बाजार पर दबाव कम करने के लिए कुछ कदम उठाने की जरूरत पड़ी तो वे ऐसा करने पर विचार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में तेल की उपलब्धता काफी है और स्थिति जल्द सामान्य हो सकती है।
इधर भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि मध्य-पूर्व में जारी तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग पर जोखिम के बावजूद देश की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर है। सरकार के अनुसार भारत ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 40 देशों तक कर लिया है, जिससे कई वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग उपलब्ध हैं।
केंद्र ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए भारत वहां से तेल खरीदता है जहां से सबसे प्रतिस्पर्धी और किफायती दर मिलती है। अधिकारियों ने दोहराया कि भारत ने कभी भी रूसी तेल खरीदने के लिए किसी देश की अनुमति पर निर्भरता नहीं रखी।
इस बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस बयान को लेकर सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति देश की जनता की सामूहिक इच्छा से तय होती है और इसे इतिहास, भौगोलिक वास्तविकताओं तथा सत्य और अहिंसा के मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।



