मुंबई, 9 मार्च।
बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान ने कहा है कि फिल्म इंडस्ट्री में पे अंतर का जेंडर से कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह एक बैलेंस्ड इकोनॉमिक सिस्टम पर आधारित है। सैफ ने बताया कि सैलरी का निर्धारण किसी एक जेंडर को फेवर करने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि यह एक्टर की मार्केट वैल्यू और बॉक्स-ऑफिस पुल का प्रतिबिंब है।
सैफ अली खान, जो जानी-मानी अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बेटे हैं, हाल ही में अपनी बहन सोहा अली खान के YouTube चैनल पर हुए पॉडकास्ट एपिसोड में दिखाई दिए। इस एपिसोड में कुणाल खेमू भी शामिल थे। बातचीत के दौरान सैफ और कुणाल ने बताया कि इंडस्ट्री में सैलरी अंतर का फैसला मुख्य रूप से बॉक्स ऑफिस इकोनॉमिक्स और ऑडियंस की डिमांड पर आधारित होता है, न कि जेंडर पर।
सैफ ने कहा कि अगर एक्टर्स का रुतबा बराबर है, तो उन्हें समान पेमेंट मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी माना कि इंडस्ट्री का पे स्ट्रक्चर इस बात पर निर्भर करता है कि कोई स्टार थिएटर तक लोगों को खींच पाता है या नहीं। सैफ ने कहा, “अगर एक्टर्स बराबर रुतबे के हैं, तो उन्हें समान पेमेंट मिलनी चाहिए। लेकिन इकोनॉमिक्स इस तरह काम करती है कि जो थिएटर में लोगों को सीट पर बिठाता है, उसे उसी अनुसार पेमेंट मिलती है।”
सैफ ने स्पष्ट किया कि यह सिस्टम किसी विशेष जेंडर को प्राथमिकता देने के लिए नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा, “यह एक्टर की मार्केट वैल्यू और बॉक्स-ऑफिस पुल का रिफ्लेक्शन है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ जेंडर के आधार पर कम या ज्यादा पेमेंट मिले। यह एक बैलेंस्ड इकोनॉमिक सिस्टम है, जहां सुपरस्टार्स अपनी कीमत जानते हैं और उसी के अनुसार पेमेंट पाते हैं।”



